Tue. Jun 23rd, 2026

मंत्री ने कहा कि सरकार को रजिस्ट्री करवाने वाले किसान और उससे पहले के मालिक परिवारों को ढूंढा जाएगा ताकि सभी सच्चाई सामने आ सकेगा । उन्होंने बताया कि भूमि को केवल 3 या -4 सीजन ही जोता जा सका है, इसमें घास-फूस को देखकर समझ में नहीं आता कि सौदा करने वाले किसान परिवार से हों और ऐसी जमीन इतने महंगे दाम पर खरीद लें।पंजाब के कृषि मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने रविवार को अमृतसर में सरहद पर स्थित गांव रानियां में कृषि विभाग द्वारा खरीदी गई लगभग 500 एकड़ जमीन का निरक्षण करने के बाद कहा कि किसान ‘स्कीम’ के तहत यह भूमि खरीदी गई है इसकी जांच करवाई जाएगा ।  

धालीवाल ने यह बताया कि 20010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की सरकार में सुच्चा सिंह लंगाह कृषि मंत्री थे और काहन सिंह पन्नू अमृतसर मे डिप्टी कमिश्नर D C। रावी नदी और सरहद पर लगी कंटीली तार के पार स्थित इस जमीन को बीज फार्म के नाम पर बहुत महंगी दर साढ़े चार लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 32 करोड़ में खरीदी की गई है । जबकि बीएसएफ की अनुमति के बिना इस भूमि में दाखिल तक नहीं हुआ।  मंत्री ने कहा कि सरकार को रजिस्ट्री करवाने वाले किसान और उससे पहला मालिक परिवारों को ढूंढा जाएगा, ताकि सारी सच्चाई सामने आ सकेगा तब उसका पूछताछ होगा । उन्होंने बताया कि जमीन को केवल 3 या 4 सीजनो मे ही जोता जा सका है, इसमें घास-फूस को देखकर समझ में नहीं आता है कि सौदा करने वाले किसान परिवार से हों और ऐसी जमीन इतने महंगे दाम पर खरीद लें। 8 करोड़ की कृषि मशीनरी हो रही बर्बाद उन्होंने कहा कि इस भूमि में पानी के लिए 30 सबमर्सिबल , बिजली और ट्रैक्टर, और अन्य कृषि मशीन की खरीद पर भी 8 करोड़ रुपये के करीब खर्च हुआ। धालीवाल ने कहा कि मैंने इस फार्म को रविवार को देखा और मन दुखी हुआ है कि किस तरह सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है। मशीनरी भी खराब हो रही है । मंत्री ने कहा कि मामले को मुख्यमंत्री भगवंत मान के संज्ञान में लाकर केंद्र सरकार से तालमेल किया जाएगा, क्योंकि इसका रास्ता बीएसएफ के अधीन है। इस जमीन का उचित प्रयोग किया जाएगा।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया