Tue. Jun 23rd, 2026

जमीन के विवाद में साथी को पीटे जाने से नाराज वकीलों ने करीब 3 बजे में मुंसिफी के सामने सड़क पर जाम लगा दिया
इससे 1 घंटे तक आवागमन बाधित रहा सीओ और कोतवाली पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा देकर जाम खुलवाया। मुंसिफ कोर्ट के पीछे रजनीकांत पुत्र महेश कुमार का एक प्लॉट है। यह प्लॉट उसने अधिवक्ता असित कुशवाहा के परिजनों से खरीदा था। गुरुवार को रजनीकांत इस प्लॉट पर निर्माण कर रहा था।

कुछ सामान लेकर ट्रैक्टर उस प्लॉट पर जा रहा था। तभी उसे रोका। इसमे दोनों पक्षों में बहेस हो गया और मारपीट शुरू हो गया । रजनीकांत पक्ष के लोगों ने असित के घर में तोड़फोड़ कर वहां रखा गाड़ी व अन्य सामान तोडफोड कर दिया। असित की पिटाई कर दी। मारपीट में अभिषेक, असित, अमित, असित की दादी फूलारानी व दूसरे पक्ष के रजनीकांत घायल हो गए। मुंसिफ कोर्ट परिसर के पास साथी की पिटाई से गुस्साए वकीलों ने उरई रोड पर जाम लगा दिया। काफी देर बाद पुलिस पहुंची तो वकील पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाने लगा । सीओ शैलेंद्र कुमार कोतवाल बलिराज शाही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के आश्वासन पर वकील हटे। दोनों पक्ष ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। जाम में कई रूटों की सवारी बसें व अन्य वाहन फंसे रहे। स्कूली वाहनों के जाम में फंसने से एक घंटे बच्चे
उरई डिस्ट्रिक्ट जालौन बार एसोसिएशन की बैठक में कोंच के अधिवक्ता असित कुशवाहा पर जानलेवा हमले की निंदा की गई। मीडिया प्रभारी अभिषेक पाठक ने कहा कि अधिवक्ता पर हुए जानलेवा हमले के आरोपी 24 के अंदर नहीं पकड़े जाते है तो अधिवक्ता आंदोलन को विवश होंगे। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के साथ इस तरह की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया