Tue. Jun 23rd, 2026

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अब तक प्रचार से दूर रहे हैं। लेकिन अमरेली में 22 नवंबर को एक बड़ी जनसभा के जरिया राहुल गांधी का गुजरात विधानसभा चुनाव में एंट्री हो रहा है। पार्टी को उम्मीद देता है कि इससे अमरेली के साथ आसपास मे 2 दर्जन से अधिक सीटों पर असर पड़ेगा क्योंकी कांग्रेस की चुनाव तैयारि को बल मिलेगा। लेकिन राहुल गांधी की रैली से पहले 20 नवंबर को अमरेली के उसी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी जनसभा होनी है, लिहाजा अचानक ही इस रैली को ‘मोदी बनाम राहुल’ के नजरिये से देखा जाने लगा है। कांग्रेस भाजपा की रैली से ज्यादा बड़ी भीड़ लाने के लिए जुट गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमरेली में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। पिछला विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के लिए तेजी से प्रचार किया था, हालांकि भाजपा को इसका कोई लाभ नहीं मिल पाया था। अमरेली की पांच में से चार सीटों राजुला, लाठी और सांवरकुंडला पर कांग्रेस के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जबकि एक सीट धारी पर भाजपा उम्मीदवार जीतने में सफलता रहे थे ।  कांग्रेस राहुल गांधी और अमरेली का जनसभा के बाद एक अन्य जनसभा आयोजित कर पार्टी के चुनाव प्रचार में मजबूत करने मे कोशिश करेगा । इसके बीच अन्य शीर्ष नेताओं के कार्यक्रम भी तय किए जा रहा हैं। अर्जुन भाई मोडवाडिया ने कहा कि आम आदमी पार्टी के यहां आने से कोई बड़ा असर नहीं होने वाला है। यहां के लोग उन्हें एक वोट कटवा जैसी पार्टी के रूप में देख रहे हैं। इसी बीच कांग्रेस ने भी 200 यूनिट बिजली, 400 रुपये में सिलेंडर और कर्जमाफी जैसी घोषणाएं कर दी हैं, लिहाजा आम आदमी पार्टी का दावा अब कमजोर पड़ गया है। उनका दावा है कि आम आदमी पार्टी का गुजरात में प्रमुख विपक्षी दल बनने का सपना पूरा नहीं हो पायेगा और उसका खाता खुलना भी मुश्किल होगा

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया