Tue. Jun 23rd, 2026

 सोमवार को भारतीय संस्कृत ज्ञान की परीक्षा आयोजित की गई। देश भर मे होनहार बच्चों को भारतीय संस्कृत का ज्ञान विज्ञान एवं वैदिक मूल्यों का महत्व बताने एवं उनके उत्थन के उद्देश्य से यह परीक्षा कराई गई। गायत्री शक्तिपाठ सिद्धार्थनगर की ओर से भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन सोमवार को इटवा व डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के माता प्रसाद जायसवाल इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, गर्ल्स एजुकेशन, राजकीय महाविद्यालय चौखड़ा, राम जानकी इंटर कालेज गिरधरपुर व सर्वोदय इंटर कॉलेज डोकम अमया में किया गया। छह परीक्षा केंद्रों में आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में करीब 1000 हजार जूनियर व सीनियर वर्ग के परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। परीक्षा को लेकर छात्र-छात्राओं में उत्साह का महौल रहा। कक्षा निरीक्षकों और आयोजन समिति ने निरीक्षण किया भारतीय संस्कृत ज्ञान परीक्षा के संयोजक जग प्रसाद ने बताया कि गायत्री परिवार की ओर से इस परीक्षा का आयोजन कराया गया है।

इसका उद्देश्य युवाओं में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय मूल्यों की स्थापना, विद्यार्थियों का चिंतन, चरित्र, व्यवहार और छात्र-छात्राओं को जीवन जीने की कला का विकास करना है। इस अवसर पर रमाकांत द्विवेदी, अष्टभुजा पांडेय, सिद्धपाल, शिव प्रसाद चौधरी, द्वारपाल चौरसिया, D J तिवारी, गोवर्धन यादव, गोपाल चौधरी, मौजूद रहे।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया