Tue. Jun 23rd, 2026

बेतिया: बिहार राज्य आशा संघ एटक की बैठक बेतिया बलिराम भवन के सभागार में वेनू देवी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ, बैठक में एटक के राष्ट्रीय सम्मेलन जो केरला में होने जा रहा है उसकी सफलता हेतु सदस्यता शुल्क भेजने पर विचार किया गया, साथ ही 21 नवम्बर को पटना में होने वाले राज्यस्तरीय प्रदर्शन को सफल बनाने पर विचार किया गया, जिला में कागज सत्यापन के नाम पर जिस आशा का भुगतान बाधित था, सबको जांच में सही करार देते हुए उनके भुगतान की अनुसंशा करने के लिए आशा डी सी एम राजेश कुमार को धन्यवाद दिया। विभिन्न पी एच सी में नव पदस्थापित आशा बी सी एम, हेल्थ मैनेजर एवं लेखापाल के मनमानी एवं रोक लगाने की मांग की गई। यदि नव पदस्थापित कर्मी अपना कार्यशैली नहीं बदलते तो जिला पदाधिकारी के समक्ष धरना देने का निर्णय लिया गया, कई पी एच सी यथा नौतन, नरकटियागंज, बेतिया, मैनाटांड, चनपटिया की आशा ने अपने पी एच सी के बी सी एम , हेल्थ मैनेजर के कार्यशैली पर असंतोष जताया। बैठक में पटना रैली से लौटने के बाद आशा विरोधी मानसिकता रखने वाले अधिकारियों एवं कर्मीयो के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया गया, बैठक को संघ के राज्य कार्यकारी उपाध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति, साधना, लालमुनि, निर्मला, लछमीना,पूनम, अनिता, सरोज, रेणु, सुधा दीक्षित, कुमुद, रिंकू, सुन्दरम, उर्वशी, सकीना, गायत्री, नसीमा, रामावती, हैरून ने संबोधित किया। संगठन को मजबूत कर आशा को सरकारी कर्मी का दर्जा दिलाने, मानदेय घोषित करने, सभी तरह के अवकाश का लाभ देने मांग को लेकर निरंतर आंदोलन का निर्णय भी लिया गया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया