Tue. Jun 23rd, 2026

अनील कुमार सिंह

अमेठी जनपद में मच्छरजनित डेंगू व मलेरिया के समुचित रोकथाम व इलाज के संबंध में कांग्रेस नेता प्रदीप सिंघल ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश का ध्यान आकृष्ट किया है।
सर्व विदित है कि जनपद अमेठी ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में मच्छरजनित बीमारी डेंगू, मलेरिया व्यापक पैमाने पर फैला हुआ है। सरकार ने बरसात के मौसम में किसी वार्ड, टोला, गांव, मोहल्ला में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया है और न ही फॉगिंग कराया है। जिसके कारण मच्छरों का प्रकोप जारी है। जिसके कारण घर-घर डेंगू व मलेरिया के मरीज हैं, जो इलाज कराने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल में जा रहे हैं. परन्तु खेदजनक है कि सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए न बिस्तर है न ही दवाईया और न ही डाक्टर हैं। मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि मरीज जमीन पर फर्श पर लेटे हुए हैं। परिणाम स्वरुप बिना इलाज बेमौत मर रहे हैं युपी के लोग, विशेषकर अमेठी में। ऐसी स्थिति में अपने मरीज की जान बचाने के लिए कुछ लोग प्राइवेट नर्सिंग होम में महंगा इलाज करा रहे हैं तो कुछ लोग झोला झाप डाक्टरों से दवा लेकर और अधिक बीमार हो रहे हैं। प्रदेश सरकार व जिला के स्वास्थ्य पदाधिकारी कागजों पर अखबारों में चिकित्सा व्यवस्था को अच्छा बताने से थक नही रहे हैं। प्रदेश सरकार झूठे जुमले छोड़ने से बाज नही आ रही है।

ऐसी परिस्थित के दृष्टिगत राज्यपाल यूपी से प्रदीप सिंघल ने जनहित में त्वरित कार्रवाई कर बीमार लोगों जांच रिपोर्ट प्रत्येक घंटे के अन्दर व मरीजों को भर्ती करने की सरल प्रक्रिया एवं मरीजों के लिए समुचित बिस्तर, ब्लड, आक्सीजन, दवाईयां की व्यवस्था प्रत्येक स्वास्थ्य केन्द्र व जिला अस्पताल में मुहैया कराये जाने तथा सम्पूर्ण अमेठी जनपद के प्रत्येक गांव, कस्बा, मोहल्ला, गली में मच्छर मारने वाली दवा की फॉगिंग कराये जाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया