Tue. Jun 23rd, 2026
योगापट्टी में संबोधित करते पीके

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के भितिहरवा आश्रम से 2 अक्टूबर 22 को जन सुराज संवाद पदयात्रा प्रारंभ किया गया। उसके 35वें दिन की शुरुआत सर्व धर्म प्रार्थना से हुई। इसके बाद प्रशांत किशोर ने महिला, पुरुष, युवा और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े जनप्रतिनिधियों से भेंट मुलाकात की और योगापट्टी की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा किया। उन्होंने सभी आगंतुकों को जन सुराज की सोच के बारे में बताते हुए कहा कि समाज मंथन करने निकले हैं, और पदयात्रा के माध्यम से सही लोगों को समाज से बाहर निकलकर उनको एक मंच पर लाएंगे। 

दोपहर के भोजन के बाद 3 बजे प्रशांत किशोर सैकड़ों पदयात्रियों के साथ यात्रा प्रारंभ किया। शनिवार की प्रस्तावित 07 किमी की पदयात्रा के दौरान जन सुराज के पदयात्री 2 पंचायतों के 8 गांवों में गए और लोगों से जन सुराज की सोच पर संवाद किया। पदयात्रा आज बिशनपूरवा, मच्छरगांवा, हथिया, देवघरुआ, मिश्रौली, विश्रामपुर और अंत में दरवालिया गांव से होते हुए रात जा विश्राम मच्छरगांव स्थित पदयात्रा कैंप पहुंची। 

शराबबंदी के कारण यूपी से अधिक बिहार में पेट्रोल डीज़ल महंगा हो गया है

देवगड़वा गांव के लोगों से संवाद कार्यक्रम में प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार जैसे गरीब राज्य में शराबबंदी लागू कर दिया। जिससे बिहार सरकार की रेवन्यू में प्रतिवर्ष 15-20 हजार करोड़ की क्षति हो रही है। जिसकी भरपाई करने को उन्होंने डीजल-पेट्रोल के मूल्य में 9 रुपये की वृद्धि कर दिया। जिसका सीधा असर बिहार की आम जन पर पड़ रहा है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने जो शराबंदी लागू किया वो धरातल पर विफल साबित हो रही है। शराब माफियाओं ने शराब की होम डिलीवरी प्रारंभ कर दिया है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया