Thu. Dec 1st, 2022

श्रीनगर सेब, बादाम, अखरोट, केसर की धरती है। डल झील से लेकर गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम सब यहां आने वालों से खुद बातें करते हैं। यहां भला कौन दहशतगर्दी का साथ देना चाहता है। लेकिन सही बात यह है कि राजनीति के रसूखदारों को कश्मीर की आवाम का ख्याल ही कहां रहता है। न कोई जमीनी परेशानियों को समझता है और न ही उसके निदान का कोई प्रयास करना चाहता है।

सेब, बादाम, अखरोट, केसर की धरती है। डल झील से लेकर गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम सब यहां आने वालों से खुद बातें करते हैं। नौगाम बाईपास पर मिले गुलाम भट्ट कहते हैं कि भला कौन दहशतगर्दी का साथ देना चाहता है। भट्ट के भाई त्राल में आतंकियों का शिकार हो गए थे। 56 साल के भट्ट कहते हैं कि उनका परिवार आतंकवाद से खुद पीड़ित रहा है, लेकिन सही बात यह भी है कि राजनीति के रसूखदारों को कश्मीर की आवाम का ख्याल ही कहां रहता है। न कोई जमीनी परेशानियों को समझता है और न ही उसके निदान का कोई प्रयास करना चाहता है। इस बारे में राज्य के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा कहते हैं कि मुझे यहां आए दो साल से अधिक हो गया। हमने श्रीनगर आने के बाद पहला काम लोगों की मुश्किल कम करने की दिशा में ही किया। रोजगार देने के मामले में हमारा प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अच्छा है। जल्द ही पंचायत स्तर तक लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने की योजना है। वह कहते हैं कि आतंकवाद पर नकेल कसकर राज्य में शांति बहाली के प्रयास किए जा रहे हैं। घाटी शांति की तरफ बढ़ रही है। राज्य में देश का राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और राष्ट्रगान गाए जाते हैं। जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई करके आवाम और राज्य के विकास के लिए आने वाला धन कुछ लोगों की तिजोरी में जाने की बजाय विकास पर खर्च हो रहा है।

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