Sun. Nov 27th, 2022

दंतेश्वरी शक्तिपीठ में दुनिया भर के भक्तों द्वारा प्रतिवर्ष आठ हजार से ज्यादा मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित कराए जाते हैं। माता के प्रति आस्था के चलते ही अमेरिका, कनाडा, मारीशस आदि देशों में बसे भारतीय दंतेश्वरी शक्तिपीठ में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित कराते हैं।

 दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा का दंतेश्वरी शक्तिपीठ देश-विदेश में स्थापित 51 शक्तिपीठों में शामिल है। माता सती का दांत यहां गिरा था इसलिए यह पावन स्थल दंतेश्वरी शक्तिपीठ कहलाता है। यहां वर्ष में दो नहीं अपितु तीन नवरात्र मनाई जाती है। तीसरी नवरात्र फागुन महीने में पूरे दस दिन आदिवासी समाज मनाता है।दंतेश्वरी धाम देश का एक मात्र ऐसा शक्तिपीठ है जो दो नदियों डंकिनी-शंखिनी के संगम तट पर है। मंदिर के ठीक सामने गरूड़ स्तंभ है। अब यहां मध्य भारत का सबसे बड़ा ज्योति कलश भवन बनाया जा रहा है। दंतेश्वरी शक्तिपीठ हजारों साल पुराना है और वर्तमान में केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है। इस शक्तिपीठ का 705 साल पहले वारंगल से आए चालुक्य नरेश अन्नमदेव ने जीर्णोद्धार कराया था।

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