Fri. Dec 2nd, 2022

भीतहा:बादलों को बरसाने वला आषाढ़ इस बार किसानों को तरसाने का काम कर गया तो सावन भी अब तक रूठा हुआ है । सावन के महीने मे बारिश नही होने के कारण किसानो के माथे पर चिंता की लकीरे खीची हुई है। अधिकतम तापमान 37 ड़िग्री तक पहुंचा हुआ है। मौसम की इस मार से किसान बेहाल हैं । और किसान पहाड़ बन गई क्षेत्र मे सूखे से हालात के कारण धान की रोपाई पिछड़ चुकी है, और कुछ किसानो के रोपे गए धान भी सूखने के कगार पर है। रूठे बादलो के चलते खेतो मे पछुआ बयार रेत उड़ा रही है। जहा बुवाई या रोपाई हो चुकी है। वहा पीली हाती फसले देख किसान के चेहरे पीले पढ़ने लगे है। बादलों के बरसने की बाट जोहते आंखो मे उमढ़ धुमड़ रहा पानी मानो कह रहा है, का बरखा जब कृषि सुखानी। आसपास के इलाको मे मौसम की मार से फसलो मे रोग व कीट लग रहे हैं जिससे इस बार धान व गन्ना के उत्पाद मे कमी की आंशका है। क्षेत्र मे किसानो के बीच फसलो को लेकर कई कहावत प्रचलित है जिससे एक है, धान पान भादो जवान, चाही नित्य स्नान ,यानी धान और पान भादो महीना में जवान होता है जिसे रोज स्नान की आवश्यकता होती है। धान के जवान होने का महीना चल रहा है खेतो मे धान के फसल लहलहाने के समय पर सुखने के कगार पर है। बारिश नही होने के कारण फसल मे बहुत प्रभावित हो रही है । धान के नित्य स्नान नही हो रहा है। बारिश कम होने की वजह से खेत सूख रहे है और खेतो मे धास उग रही है। अब धान की निकौनी करवना किसानो की मजबूरी है। जिससे काफी मजदूर लगेगे। धान को कितनी मात्रा मे पानी मिलना चाहिए वह नी मिल पाया है। कृषि विभाग का भी मानना है कि यहा धान की फसल के लिए सही नहीं है। इससे किसानो की चिंता बढ़ चली है।

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