Wed. Jun 24th, 2026

 

गोदावरी देवी रामचंद्र प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर के सर्वप्रिय आचार्य के निधन 

बेतिया: गोदावरी देवी रामचंद्र प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर पुरानी बाजार नरकटियागंज के वरिष्ठ गणित आचार्य प्रभात कुमार मिश्र का निधन हो गया। अत्यंत मृदुल स्वभाव के मृदुभाषी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति रहे प्रभात कुमार मिश्र विद्यार्थियों में काफी प्रिय रहे। विद्यालय सबसे खुलकर बातें करना तथा हमेशा मुस्कुराते रहना उनके स्वभाव में शामिल रहा। सादा जीवन उच्च विचार के पोषक प्रभात मिश्र ने जीवन की कठिनाइयों से कभी हार नहीं माना। जीवन पर्यंत संघर्ष करते हुए आगे बढ़ते रहे। उन्होंने सरस्वती विद्या मंदिर पुरानी बाजार नरकटियागंज में 2012 में योगदान किया।


उनकी मृत्यु से संपूर्ण विद्यालय परिवार काफी मर्माहत है। विद्यालय परिवार के साथ प्रबंधकारिणी समिति ने प्रभात कुमार मिश्र के निधन पर शोक व्यक्त किया। ईश्वर आत्मा को शांति एवं शोक संतप्त परिवार को धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करें।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया