Tue. Jun 23rd, 2026

 सातों दिन आसमान में बादलों का पहरे रहा। दोपहर के या  शाम समय  तेज हवाएं चला  और तेज वायु के झोंके से वर्षा भी पड़ीं। शुक्रवार को भी रात के समय लगभग  7 बजे  के बाद लगभग 20 से 25  मिनट तक बहुत  तेज हवाएं चलीं। मौसम विभाग के मुताबिक इसकी गति करीब 40 किलोमीटर प्रतिघंटे रही। आसमान में 30 हर सैकड़े पर बादल मे धुन्धला छाए रहे। इसकी वजह से उमस का अहसास होता रहा। वर्ष 2018 से अप्रैल महिना  के पहले  हफ़्ता में इसी तरह की स्थिति बनती रही है, पर  इस बार दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से 4 या 5  डिग्री पैमानेनीचे पर बना हुआ है। इस दौरान एक अप्रैल को  हल्की बारिश.  गिरी  है

अन्य दिनों में भी वायु के झोंके से वर्षा  बौछारें पड़ी हैं, लेकिन उसे अंदाज़ नहीं जा सकते  है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के मौसम वैज्ञानिक हरि प्रसाद चंद्रा ने बताया कि इन दिनों मध्य भारत में अन्य राज्यों की तुलना में तापमान थोड़ा अधिक है। इसकी वजह से हर दिन तेज हवाएं चल रही हैं और वायु के झोंके से वर्षा पड़ रही हैं। इन दिनों तमिलनाडु से विदर्भ तक एक पट्टी बनी हुई है। इसके ठीक नीचे नमी युक्त हवाएं चल रही हैं। इसकी वजह से मौसम पल-पल बदलता हुआ लग रहा है। 14 अप्रैल के बाद मौसम बदलेगा।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया