Sun. Sep 13th, 2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में रबी योजना-2026 के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन

apnibaat.org

पटना : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा इसके रांची स्थित अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्रों (रामगढ़ एवं बक्सर) द्वारा दिनांक 13 सितम्बर, 2026 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लगभग 186 लोगों ने भाग लिया, जिसमें 101 किसान शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री ने किसानों, वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों को पिछले रबी मौसम में रिकॉर्ड उत्पादन के लिए बधाई दी। उन्होंने आगामी रबी मौसम की बेहतर तैयारी के लिए स्थानीय परिस्थितियों और जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रबी योजना किसानों की जरूरतों के आधार पर गांव, प्रखंड और जिला स्तर से तैयार होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचनी चाहिए। इसमें आईसीएआर, कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य सरकार, एटीएमए और किसानों की सक्रिय भागीदारी है। श्री चौहान ने छोटे किसानों  के लिए समेकित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने और इसे किसानों के खेतों पर प्रदर्शित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृषि विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और कृषि यंत्रीकरण को भी बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान के तहत किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने तथा किसानों को फसल बीमा, वीबी-जी राम जी और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने पर भी बल दिया। डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, आईसीएआर तथा श्री आतीश चंद्रा, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने भी रबी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।

इस अवसर पर किसान-वैज्ञानिक संवाद भी आयोजित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने कहा कि किसान के लिए समय सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। इसलिए खेती के प्रत्येक कार्य को सही समय पर करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि रबी फसलों की योजना बनाते समय भी समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नौबतपुर प्रखंड के कराई गांव के किसानों ने जल की अनिश्चित उपलब्धता को देखते हुए उपयुक्त फसल किस्मों के बारे में वैज्ञानिकों से जानकारी ली। वैज्ञानिकों ने किसानों को उनकी परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त किस्मों के बारे में बताया। संवाद के क्रम में फसल अवशेष प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि, समय पर बुवाई और कटाई, फसल चक्र, समेकित कृषि प्रणाली, संतुलित उर्वरक उपयोग, पशुपालन, बकरी पालन और पोषण वाटिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने संस्थान की प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण इकाइयों का भ्रमण किया और व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। यह भ्रमण ‘देखकर सीखना’ के सिद्धांत पर आधारित रहा।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply