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साधना भक्ति में मोक्ष निहित : आचार्य धर्मेन्द्र

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चक्की बक्सर : भारत के महान संत जीयर स्वामी महाराज के कृपापात्र विश्वाचार्य ब्रह्मपुर पीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र महाराज ने धर्मावती नदी के पावन तट अवस्थित भरियार गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा में कृपालु कृष्ण की जीवंत बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण की सभी लीला भक्त कल्याणकारी और श्रद्धा भक्ति जागृत करने वाली है। पूतना के चरित्र वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि भगवान सबकी मनोकामना पूरा करते हैं। पूर्व जन्म में पूतना दानवीर बली की भगिनी निवेदिता रही जो वामन भगवान के स्वरूप को देखकर कामना की कि काश! यह ब्रम्हचारी मेरा पुत्र होता, लेकिन जब वामन भगवान ने बली से दान में तीन पग भूमि माँगा और तीन पग भूमिपरी नहीं होने पर बली को बंदी बना लिया तो कहा यह विष देकर मार देने लायक है। भगवान ने उसकी मन की बात जानकर कहा तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी, जब मैं द्वापरयुग में आऊंगा, दूध भी पीला लेना, विष भी दे देना। वही निवेदिता पुतना के रुप में अवतरित हुई, भगवान ने उसे सद्गति प्रदान किया। भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का वर्णन करते हुए कहा कि माखन कोमल, निर्मल होता है, भगवान को कोमलता व निर्मलता प्रिय है। मृदा भक्षण लीला को वर्णन करते कहा कि भगवान गुणातीत,रस्सातीत है। मिट्टी रज है अर्थात भगवान रज धारण कर पृथ्वी की क्षमाशीलता धारण कर रहे हैं। नलकूबर और मणिग्रीव के उद्धार की कथा कहते हुए कहा किये दोनों कुबेर के पुत्र हैं, तरूण हैं सुन्दर है, अहंकार के कारण देवर्षि नारद का अपमान करते,शाप पाते हैं और अम्लार्जून के वृक्ष बनते हैं। श्रीकृष्ण के अंग-संग से निजलोक को प्राप्त करते हैं। भगवान सब कुछ सह सकते हैं ,पर संत का अपमान नहीं।कभी संत का अपमान न हो , सावधानी रखनी चाहिए। भगवान के गोकुल से वृन्दावन पधराने की कथा का रहस्य बतलाते हुए कहा कि भगवान प्रकृति मध्य रहने, गोपालन, पर्यावरण संतुलन की शिक्षा देने हेतु वृन्दावन बिहारी बनते हैं। वृन्दावन का अर्थ और महिमा को बताते हूं ब्रह्मजी द्वारा गोपों बछड़ो की चोरी की कथा कहते उनके अहंकार विसर्जन की कथा कहते हुये कहां कि भगवान किसी का अहंकार नहीं रहने देते। कलियानाग नाथन की कथा कहते आचार्य ने बताया कि यह कथा यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की कथा और नदियों को प्रदूषण मुक्ति का संदेश देती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते कंस के द्वारा कृष्ण बध के लिए बार बार राक्षसों को भेजने और कृष्ण द्वारा उनका बध होने पर भी कंस हार नहीं मानता, मतलब दुष्ट प्रकृति वाले अंतिम श्वास तक दुष्कर्म, दुष्टता का त्याग नहीं करते। आचार्य ने संदेश दिया कि कलिकाल में भगवान की कथा श्रवण श्रेष्ठ भक्ति है। यह मुक्ति का सरल व सर्वोच्च साधन है। धर्मावती नदी तट अवस्थित श्रीलक्ष्मी नारायण सह शतचंडी यज्ञ स्थल भरियार भक्तों के जमावड़ा से एक नूतन कुंभ बना गया है। पूज्य जीयर स्वामी के दर्शन के लिए भक्ति मती माताओ बहनों, भाइयों श्रद्धालुओं की आस्था परिलक्षित है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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