Wed. Jun 24th, 2026

 

apnibaat.org/APNI BAT

पटना : संतविनोबा भावे की संस्थापित निर्भिक, निष्पक्ष, असांप्रदायिक, अहिंसक, अराजनैतिक विचारकों का व्यासपीठ आचार्यकुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र आचार्य पूर्व कुलपति वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी ने नालंदा बिहार निवासी अधिवक्ता व पत्रकार कुमुद रंजन सिंह को आचार्य कुल का पत्रकार कोषांग का प्रभारी अपने पत्रांक 925/24 से नियुक्त किया है। अधिवक्ता कुमुद वर्तमान में नेशनल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव है। उनकी पत्रकारिता एवं सामाजिक कार्यों पर लगभग 20 वर्ष के अनुभव को देखते हुए, उपर्युक्त जिम्मेवारी सौंपी गई है। प्रभारी बनने की खबर मिलते ही उन्हें बधाईयां मिल रही है। महाराष्ट्र से डॉ बालकृष्ण रामभाऊ महाजन, गुजरात से कुमुद वर्मा, उत्तराखंड से गीता कौर, झारखंड से सुप्रिया सिंह, दिल्ली से जगदीश पंवार, मध्यप्रदेश से उषा यादव, उत्तरप्रदेश से संतोष कुमार यादव, बिहार के नवादा से अजीत कुमार सहित अन्य लोगों ने बधाई देते हुए, अतिशीघ्र पत्रकार कोषांग को विस्तारित करने का विश्वास व्यक्त किया है।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया