Tue. Jun 23rd, 2026
विश्व कल्याण महायज्ञ, आर्य समाज मंदिर नरकटियागंज, हम सुधरेंगे-जग सुधरेगा: महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती 
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बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के अनुमंडलीय शहर नरकटियागंज स्थित आर्य समाज मन्दिर परिसर में विश्व कल्याण महायज्ञ के प्रवचन के 5 वीं रात्री अंबाला की विदुषी श्वेता आर्या ने भजनोपदेश से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए, नारी शक्ति और भद्र आर्यों को वैदिक धर्म की ओर लौटो, नारा को चरितार्थ किया और जागृति का बिगुल फूंका।

तत्पश्चात लखनऊ की विदुषी निष्ठा विद्यालंकार ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में नारी शक्ति के योगदान पर विचार व्यक्त करते हुए, नारियों में आत्म विश्वास भर दिया। स्वामी
सच्चिदानंद ने सर्वाधिक प्रहार पाखंड पर किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की आराधना अवश्य करें, किंतु ढोंग, आडंबर और पाखंड से दूर रहें।

संदीप आर्य गिल ने करवां चौथ व्रत पर कहा कि भूखे रहने से नहीं कम बोलने से पतियों की आयु में वृद्धि होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन करने से भ्रांतियों से मुक्ति मिलेगी। गिल का भजनोपदेश ‘प्यारे ऋषिवर तेरा जवाब नहीं,
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया