Tue. Jun 23rd, 2026

पंच सरपंचों ने अधिकार की लड़ाई में न्याय यात्रा को सफल करने के लिए किया एकजुटता का प्रदर्शन

 

सुपौल, बिहार । पंच सरपंच संघ सुपौल 26 अक्टूबर 2023 को न्याय रथ यात्रा के सुपौल पहुंचने पर भव्य स्वागत करेगा। वहां न्याय यात्रा सम्मेलन सम्मान का आयोजन किया जाएगा। उपर्युक्त आशय की जानकारी बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह कोशी जोन प्रभारी किरण देव यादव ने दी। श्री यादव ने कहा कि पंच सरपंचों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है, उचित मांग एवं अधिकार से वंचित सरपंच के दो वर्षों से वेतन लंबित है, सम्मानजनक वेतन वृद्धि सरकार नहीं कर रही है। न्यायकर्ता के साथ सरकार अन्याय कर रही है, पंच सरपंचों को सम्मान सुरक्षा सुविधा वेतन बीमा भत्ता पेंशन अन्य अधिकार देने, एमएलसी चुनाव का वोटर बनाने, ग्राम कचहरी को सर्व सुविधा संपन्न करने के सवाल को लेकर न्याय यात्रा निकाली गई है। पूरे बिहार के भ्रमण के बाद 30 नवंबर 2023 को गांधी मैदान में न्याय यात्रा सम्मेलन कर राजभवन मार्च किया जाएगा। बिहार के राज्यपाल के समक्ष बिहार के सवा लाख पंच सरपंच सामूहिक इस्तीफा देंगे। पंच सरपंच संघ की जिलाध्यक्ष गीता देवी ने अध्यक्षीय सम्बोधन में न्याय यात्रा सम्मेलन में आधिकाधिक संख्या में जिला के सभी पंच सरपंचों से भाग लेने का अपील किया। बिहार प्रदेश पंच सरपंच संघ सुपौल का बैठक छातापुर आवास पर संघ कार्यालय परिसर में हुई। जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष गीता देवी ने किया। मंच संचालन समन्वयक धीरेन्द्र यादव ने किया। विषय प्रवेश अरविंद शर्मा ने किया तथा न्याय यात्रा सम्मेलन करने व भव्य स्वागत करने का प्रस्ताव जिला संयोजक लक्ष्मी यादव ने रखा। बैठक में हॉल या मैदान बुक करने, प्रशासन को लिखित सूचना देने, बैनर पर्चा पोस्टर प्रकाशित करने, सभी प्रखंड में श्रृंखलाबद्ध बैठक करने, पंच सरपंचों को अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने, सरपंच संपर्क अभियान चलाने, कोष संग्रह करने, कार्यक्रम स्थल पर 9:00 बजे सुबह पहुंचने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। बैठक मे जय कुमार भगत, संतोष कुमार मंडल, प्रवीण राम, मोहम्मद जफरुल्लाह, प्रभाष अकेला, गुलाबचंद शाह, विनोद साहनी, शशि यादव, अरुण कुमार मंडल, सुंदर मुखिया, सुमन कुमार शाह, परमेश्वरी पासवान ने चट्टानी एकता का परिचय देते हुए, एकजुटता का प्रदर्शन किया एवं न्याय यात्रा को ऐतिहासिक सफल बनाने का संकल्प लिया। जय कुमार भगत ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला के नेतृत्व में 26 अक्टूबर 2023 को 9:00 बजे गांधी मैदान सुपौल न्याय यात्रा रथ पहुंचेगी।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया