लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती, राष्ट्रीय एकता दिवस पर विशेष

apnibaat.org/डॉ अनमोल कुमार
स्वतंत्रता के पश्चात खण्ड खण्ड भारत को अखण्ड गणराज्य बनाने का श्रेय सरदार बल्लभ भाई पटेल को जाता है। भारत सिर्फ एक देश नहीं, 562 रियासतों का टुकड़ा-टुकड़ा नक्शा छोड़ अंग्रेज तो चले गए, प्रत्येक राजा सोचता रहा कि – अपना अलग देश बना लें। उस समय एक आदमी ने धोती पहनी, बिना सेना, बिना युद्ध के, सिर्फ बातचीत, समझ और जरूरत पड़ी तो लौह संकल्प से 562 रियासतों को एक भारत में मिला दिया। इसलिए उन्हें भारत का बिस्मार्क और लौहपुरुष कहा गया। पटेल को याद करना क्यों आवश्यक है? एकता के शिल्पकार, हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर जैसे सबसे मुश्किल केस पटेल ने संभाले। किसान के बेटे, किसान के नेता, बारडोली सत्याग्रह में किसानों के लिए अंग्रेजों से टकराव, तभी से जनता ने उन्हें ‘सरदार’ कहा। अनुशासन और स्पष्टवादी, नेहरू जी के विपरीत, पटेल बात घुमाते नहीं कहते कि – ‘मंजिल पर पहुंचने के लिए रास्ते में भौंकने वाले हर कुत्ते को पत्थर नहीं मारा जाता।’
आज का प्रतीक -स्टैच्यु ऑफ यूनिटी गुजरात में नर्मदा किनारे 182 मीटर की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति, उन्हीं की सोच की ऊंचाई को दिखाती है। उनका जन्म 31 अक्टूबर को हुआ, दिन 2014 से रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया जाता है – क्योंकि पटेल ने कहा था: – “इस देश की मिट्टी में कुछ खास है, जो लाखों बाधाओं के बावजूद हमेशा एकता की ओर लौटती है।”
बिहार हो या गुजरात, पटेल का संदेश एक ही है – भाषा, जात, धर्म अलग हो सकते हैं, पर हम पहले भारतीय हैं।सरदार पटेल को शत-शत नमन।
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लौह महिला इंदिरा गाँधी की शहादत दिवस एवं लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि
भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश की एकता के लिए अपने प्राण की आहुति दिया।
उन्हें पंडित नेहरू प्यार से ‘प्रियदर्शिनी’ कहते रहे।
इंदिरा गांधी का नवंबर 1917, इलाहाबाद में हुआ।
माता-पिता जवाहरलाल नेहरू और कमला नेहरू की एकमात्र सन्तान रहीं, वे 1966-1977 और 1980-1984, देश के लिए 1971 का युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण किया, 93,000 पाक सैनिकों का आत्मसमर्पण कराया, दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी जीत में से एक, तभी अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें ‘दुर्गा’ कहा। हरित क्रांति और बैंकों का राष्ट्रीयकरण: किसानों को आत्मनिर्भर बनाया और बैंकों को आम गरीब तक पहुंचाया।
पोखरण 1974 पहला परमाणु परीक्षण – भारत को दुनिया की परमाणु शक्ति बनाया।
नारा दिया – ‘गरीबी हटाओ’
अंतिम दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देश में तनाव था। 31 अक्टूबर की सुबह उन्होंने कहा – मैं आज जीवित हूँ, कल शायद न रहूँ… मेरे खून की हर बूंद भारत को मजबूत करेगी।’ कुछ घंटों बाद ही अपने ही सुरक्षाकर्मियों की गोलियों से वे शहीद हो गईं। इंदिरा ने कहा था – मेरे पिता ने स्वतंत्र भारत का सपना देखा, मैंने उस सपने को हकीकत में बदलने का प्रयास किया।’ भारत की एकता और अखंडता के लिए दिया गया उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।
इंदिरा गाँधी को विनम्र श्रद्धांजलि।
