Sat. Oct 31st, 2026

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त के लाइव प्रसारण कार्यक्रम में भाग लिया

पटना: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी किए जाने तथा “खेत बचाओ अभियान” के अवसर पर 30 अक्टूबर, 2026 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में लाइव प्रसारण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से पीएम-किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी करने के साथ-साथ विभिन्न सुविधाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के माध्यम से रासायनिक प्रदूषण से धरती को बचाने का आह्वान किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कुल 417 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 311 किसान शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ माननीय मंत्री द्वारा संस्थान परिसर में पौधरोपण के साथ हुआ। इसके पश्चात उन्होंने प्राकृतिक खेती, फल आधारित पोषण वाटिका, समेकित कृषि प्रणाली मॉडल एवं अन्य अनुसंधान इकाइयों का अवलोकन किया। मंत्री महोदय ने संस्थान द्वारा आयोजित कृषि प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें उन्नत फसल किस्मों एवं पशु नस्लों, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जैव उर्वरकों, हरी खाद, प्राकृतिक खेती तथा समेकित कृषि प्रणाली से संबंधित तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
किसानों को संबोधित करते हुए मंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 24वीं किस्त जारी होने पर लाभार्थी किसानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय सहायता से किसानों को कृषि आदान की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियों के संचालन में मदद मिलेगी। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे मृदा एवं जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा तथा पर्यावरण प्रदूषण में कमी लाने में मदद मिलती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए जैव उर्वरकों, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों के उपयोग जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने पारंपरिक धान-गेहूं आधारित फसल प्रणाली से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाली फल एवं सब्जियों की खेती अपनाने तथा फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने पत्तागोभी, प्याज एवं अन्य सब्जियों के गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने उन्नत तकनीकों, संसाधनों के कुशल प्रबंधन, बेहतर बाजार संपर्क तथा मूल्य संवर्धन के माध्यम से खेती की लागत कम करने पर भी जोर दिया। मंत्री ने किसानों को स्वयं सहायता समूहों एवं किसान समूहों के रूप में संगठित होकर सामूहिक रूप से सब्जियों की खेती एवं विपणन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने समूह स्तर पर 4–5 टन क्षमता वाले छोटे कोल्ड स्टोरेज केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि कृषि उत्पादों की भंडारण अवधि बढ़ाई जा सके और किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेचने से बचाया जा सके। उन्होंने छोटे एवं सीमांत किसानों की आजीविका में सुधार तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा विकसित तकनीकों एवं किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही, वैज्ञानिकों से इन पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों को पोषण एवं विभिन्न स्वास्थ्य लाभों की दृष्टि से ओल एवं सहजन की खेती अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया एवं रबी मौसम की सब्जियों के बीज पैकेट भी वितरित किए। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने मुख्य अतिथि एवं उपस्थित किसानों का स्वागत किया। उन्होंने किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान की किसान केंद्रित अनुसंधान गतिविधियों एवं सामाजिक-आर्थिक पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि इनका उद्देश्य टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने किसानों से आईसीएआर एवं अन्य कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर विज्ञान आधारित कृषि तकनीकों को अपनाने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान देने का आह्वान किया।
इससे पूर्व आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने किसानों के साथ प्राकृतिक खेती, धान परती भूमि प्रबंधन, रबी फसलों की खेती, हरी खाद, समेकित कृषि प्रणाली तथा संतुलित उर्वरक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया और तकनीकी जानकारी साझा की। कार्यक्रम के अंत में डॉ. उज्ज्वल कुमार, प्रभागाध्यक्ष, सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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