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सरिस्ताबाद में ‘खेत बचाओ अभियान’ अंतर्गत किसान गोष्ठी एवं जागरुकता कार्यक्रम आयोजित, 112 किसान शामिल हुए, टिकाऊ कृषि अपनाने पर बल

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पटना :भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने दिनांक 28 अक्टूबर, 2026 को पटना जिला के नौबतपुर प्रखण्ड के सरिस्ताबाद गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’अंतर्गत किसान गोष्ठी एवं जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में 54 महिला एवं 58 पुरुष सहित कुल 112 किसान शामिल हुए। इस क्रम में किसानों को फसल विविधीकरण, फसल चक्र, समेकित कृषि प्रणाली, वैज्ञानिक पद्धति से मत्स्य पालन तथा कृषि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन ने किसानों को खेती में समयबद्धता, खाद एवं उर्वरकों की उचित मात्रा, गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, जल एवं मृदा संरक्षण तथा बेहतर कृषि प्रबंधन अपनाने का परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि बाजार की मांग, वित्तीय संसाधनों, समय पर तकनीकी सूचना और आधारभूत संरचनाओं का समुचित उपयोग कर कृषि लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है। डॉ. मणिभूषण, प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों को फसल चक्र अपनाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने समेकित कृषि प्रणाली की उपयोगिता बताते हुए कहा कि विभिन्न कृषि उद्यमों को एक-दूसरे से जोड़कर खेती की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है तथा किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाई जा सकती है। डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल, वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित मत्स्य पालन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने तालाब के मेड़ों पर फलदार वृक्ष लगाने की उपयोगिता भी बताई। इससे उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने, अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ाने और कृषि के साथ मत्स्य पालन को जोड़कर समेकित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है। पी.के. सिंह, सहायक मुख्य तकनीकी पदाधिकारी ने किसानों को फसल चक्र में दलहनी एवं तिलहनी फसलों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इन फसलों को अपनाने से खेती में विविधता बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण और कृषि प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायता मिल सकती है। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरुक करना, मृदा एवं जल संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना तथा फसल उत्पादन और मत्स्य पालन के समन्वय से खेती को अधिक लाभकारी बनाना रहा। इस पहल के माध्यम से किसानों को स्थानीय संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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