Wed. Jun 24th, 2026

बिहार लोक सेवा आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति पर उठे प्रश्न

APNI BAT/apnibaat.org

पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) में घोटाले को लेकर एक बार फिर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इसे बिहार के प्रतिभावान युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते हुए आरोप लगाये गए हैं कि आयोग के वर्तमान अध्यक्ष की नियुक्ति ही गलत ढंग से हुई है। जानकार कहते है कि यदि आयोग के वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व कमिश्नर की सूक्ष्मता पूर्वक जांच हो, तो पूरे मामला का पर्दाफाश हो सकता है। आरोप लगाया गया है कि लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई और यह पूरे घोटाले(स्कैम) का केंद्र बिंदु हो सकता है। उपर्युक्त मामला ने युवाओं में आक्रोश पैदा कर दिया है। अभ्यर्थियों व बीपीएससी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं का कहना है कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर नीतिगत कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार लोक सेवा आयोग घोटाले को लेकर युवाओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व आयुक्त की जांच की मांग के साथ प्रश्न यह उठता है कि क्या सरकार इस मामला में कोई ठोस कदम उठाएगी, या यह मामला सिर्फ राजनीति की भेंट चढ़ जाएगी….?

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया