Wed. Jun 24th, 2026

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पटना/मुजफ्फरपुर : बिहार के मुजफ्फरपुर में निर्माणाधीन सेफ्टी टैंक में दम घुटने से पति-पत्नी की मौत की खबर मिली है। शौचालय के संटरिंग खोलने मे दम घुटने से मौत बताई जा रही है।….पूरे क्षेत्र में शोक का वातावरण बना है। जेसीबी की सहायता से से शव को टंकी से बाहर निकाला गया। सूत्र बताते हैं कि मुजफ्फरपुर जिला के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मुरौल ब्लॉक के दरधा महमदपुर गांव में एक दंपत्ति शौचालय की सेफ्टी टैंक में गिरने से अपनी जान गंवा बैठे। मृतक दंपत्ति अनील सहनी और उनकी पत्नी परमिला देवी बताई गई है। सेफ्टी टैंक में दम घुटने से पति और पत्नी की छटपटा कर दर्दनाक मौत हो गई। पत्नी को बचाने के क्रम में पति भी जान गंवा बैठा। एक परिवार के दो लोगों की एक साथ मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का वातावरण बन गया है। घटना के बाद वहां अफरा तफरी मच गई। दम्पत्ति के घर वहां के लोगो की भीड़ जुट गई। जेसीबी की सहायता से दोनों मृतक के शव को शौचालय की टंकी से बाहर निकाला गया। सूचना मिलने के बाद घटना स्थल पर पहुची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया। मिली जानकारी के अनुसार अनील सहनी घर बनवाने का काम कराने के क्रम में शौचालय का निर्माण करा रहा था। सेप्टिक टैंक का निर्माण के क्रम में पक्का ढलाई के बाद शटरिंग निकालना बाकी था, पति-पत्नी दोनों मिलकर काम कर रहे थे इसी दौरान अनील सहनी के पत्नी टंकी के अंदर चली गई। टंकी में जहरीली गैस भरने का अंदाजा उन्हें नहीं रहा, अचानक पत्नी बेहोश होने लगी। इस क्रम में पत्नी को बचाने के लिए अनील सहनी शौचालय की टंकी में कूद गया। टंकी में कूदने के साथ वह भी अचेत हो गया। घटना की जानकारी मिलते ही वहां के लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। घटनास्थल पर उपस्थित ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। अस्पताल पहुंचने के पहले ही दोनों की मौत हो चुकी थी । अनील सहनी गांव में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करता रहा। पुलिस अवर निरीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली है कि दंपत्ति की मौत शौचालय की टंकी में गिरने और दम घुटने से हुई है। दंपति के शवों को जेसीबी से टंकी से बाहर निकाला गया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया