Wed. Jun 24th, 2026

विज्ञान के चमत्कारो से भरे आज के युग में दों और ढ़ाई साल के बच्चों को भी छोटे छोटे हाथो से बडा मोबाइल पकड़ते है। और उनसे गाने सुनते है। कई प्रकार के गेम्स आदि और भी चीजे आते है। जिसमें बच्चा कम उम्र में वे सब पकडते है। परिणामस्वरुप शरीर का आक बढ़ने पर भी वें अपने सूक्ष्म मन को सम्भालने में असमर्थ ही रह जाता है। आज यदि किसी घर में चार सदस्य हो और मोबाइल एक हैं तो उस पर एक दुसरे छीना झपटी करते है। हर कोई उस एक का मालिक बनना चाहता है। परन्तु मन तो विधाता नें जन्मजात सबको अपना अपना दे रखा है। क्या हम उसके मालिक बन पाएं। एक बार एक शिष्य ने अपने गुरुदेव से देवताओ को वश करने का मंत्र मांगा।

आधुनिक मोबाइल में इन्टरनेट कनेक्शन के माध्यम से विश्व भर के दृश्य और जानकारियाँ उपलब्ध रहती है। ऐसे मोबाइल को हाथ में लेते ही मनुष्य को लगता है। कि दुनिया मेरी मुटठी में आ गई है परंतु वास्तविकता यह है। कि वह मोबाइल की मुटठी में आ जाता है। मोबाइल पर नजरें गड़ाए गड़ाए उसके नजरे कई आवश्यक कार्यो कर्तवयों और महत्वपूर्ण सम्बन्धो से हटने लगते है।

 

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया