Fri. Oct 2nd, 2026

सूरत जैसे प्रभु की मूरत
वाणी थी जगत की कल्याणी
शान्तिदूत बन आई धारा पर
नैनों में समाया नूर रुहानी
युगों युगों तक गूजेगी
दादी तेरी अमर कहानी

बाल्यकाल से सखा बनाया
इस सृष्टि के रचयिता को
तोडकर सारें लौकिक बंधन
अपनाया उस परमपिता को लुटा दिया सर्वस्व उसी पर
सौपं दिया सारा तन मन धन।

 

 

 

 

 

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