Wed. Jun 24th, 2026

प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड की गति तेज करने को सांसद सुनील कुमार ने संगठनात्मक बैठक किया

बेतिया : प्रधानमंत्री आयुष्मान कार्ड बनाने को लेकर वाल्मीकिनगर सांसद सुनील कुमार के नरकटियागंज स्थित आवास पर जदयू के पदाधिकारियों एवं प्रमुख कार्यकर्ताओं की बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र के सभी प्रखंड के जदयू अध्यक्ष एवं महासचिव शामिल हुए। उपर्युक्त बैठक में बताया गया है कि पश्चिम चम्पारण जिला में 19 लाख आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित है। उपर्युक्त योजना में 5 लाख रुपए का स्वास्थ सम्बंधी चिकित्सकीय खर्च दिए जाते हैं। जिसमें 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राशि राज्यांश देय होता है। सांसद सुनील कुमार ने बताया कि अभी तक कुल 1,90,000 कार्ड जिला में बन चुका है। जिला में गरीबों की कल्याणकारी योजनाओं में एक आयुष्मान भारत कार्ड का मात्र 10 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया जा सका है। उपर्युक्त योजना में कार्ड बनाने की गति तीव्र करने के लिए सांसद सुनील कुमार ने संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक किया। उपर्युक्त जानकारी सांसद के नरकटियागंज अनुमंडलीय प्रेस प्रतिनिधि केदार प्रसाद ने मीडिया कर्मियों को दी।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया