Tue. Jun 23rd, 2026

 

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत रामनगर मिल कालोनी, हरिनगर के रहने वाले नंद किशोर महतो की पुत्री श्वेता कुमारी, 22 वर्ष की मृत्यु चिकित्सा के अभाव में होने की खबर है। उल्लेखनीय है कि सोमवार की रात सांस लेने में परेशानी पर श्वेता कुमारी को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल बेतिया में परिजनों ने भर्ती किया। जीएमसीएच बेतिया में चिकित्सकों व कर्मियों ने भर्ती करने के बाद श्वेता को देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं आया और सांस लेने में परेशानी होती रही पर कोई ऑक्सीजन लगाना, उचित नहीं समझा। श्वेता के परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण 4 घंटे के बाद श्वेता ने दम तोड़ दिया। इस सम्बंध में मृतक के पिता नंद किशोर महतो ने बताया कि जब उनकी पुत्री को अस्पताल में भर्ती किया गया तो अस्पताल में मौजूद नर्स ने पानी चढ़ाया और ऑक्सीजन की कमी होने की बात बताई। परंतु ऑक्सीजन चढ़ाने के लिए एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल में मौजूद नहीं होने के कारण उनकी पुत्री को ऑक्सीजन नहीं दिया जा सका। उनकी पुत्री बेड पर 4 घंटा तड़पती रही और कोई भी चिकित्सक देखने तक नहीं पहुंचा। अंततोगत्वा श्वेता ने भ्रष्ट अमानवीय व्यवस्था के नाम तड़प-तड़प प्राण त्याग दिया। उसकी चीखे नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई। परिजनों के चिल्लाने और शोरमचाने पर भी कोई मानवीय चेहरा सामने नहीं आया। मृतका के परिजनों के अनुसार मानो अस्पतालों में धरती के देव नहीं, दानवों की व्यवस्था सुदृढ़ है। जिला मुख्यालय बेतिया में स्वास्थ्य सुविधा के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल अरबों रुपए की लागत से तो बन गया, परंतु इस प्रकार की लापरवाही के कारण, किसी न किसी मरीज की आए दिन मौत हो जा रही है। आखिर इसके लिए दोषी कौन….? बिहार के सभी स्वास्थ्य मंत्री बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ होने का लाख दावा कर लें, धरातल पर चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मियों और सुविधा के अभाव में रोगी दम तोड़ रहे हैं। अब तो यही लग रहा है कि सरकारी अस्पतालों में मरीज भाग्य भरोसे बच जाए तो वह ईश्वरीय कृपा। परंतु सरकारी व्यवस्था की कृपा आमजन को नहीं संभवतः शासन और प्रशासन को मिल रही है।
Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया