Fri. Mar 1st, 2024

 

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत रामनगर मिल कालोनी, हरिनगर के रहने वाले नंद किशोर महतो की पुत्री श्वेता कुमारी, 22 वर्ष की मृत्यु चिकित्सा के अभाव में होने की खबर है। उल्लेखनीय है कि सोमवार की रात सांस लेने में परेशानी पर श्वेता कुमारी को राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल बेतिया में परिजनों ने भर्ती किया। जीएमसीएच बेतिया में चिकित्सकों व कर्मियों ने भर्ती करने के बाद श्वेता को देखने के लिए कोई चिकित्सक नहीं आया और सांस लेने में परेशानी होती रही पर कोई ऑक्सीजन लगाना, उचित नहीं समझा। श्वेता के परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही के कारण 4 घंटे के बाद श्वेता ने दम तोड़ दिया। इस सम्बंध में मृतक के पिता नंद किशोर महतो ने बताया कि जब उनकी पुत्री को अस्पताल में भर्ती किया गया तो अस्पताल में मौजूद नर्स ने पानी चढ़ाया और ऑक्सीजन की कमी होने की बात बताई। परंतु ऑक्सीजन चढ़ाने के लिए एक भी ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल में मौजूद नहीं होने के कारण उनकी पुत्री को ऑक्सीजन नहीं दिया जा सका। उनकी पुत्री बेड पर 4 घंटा तड़पती रही और कोई भी चिकित्सक देखने तक नहीं पहुंचा। अंततोगत्वा श्वेता ने भ्रष्ट अमानवीय व्यवस्था के नाम तड़प-तड़प प्राण त्याग दिया। उसकी चीखे नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह गई। परिजनों के चिल्लाने और शोरमचाने पर भी कोई मानवीय चेहरा सामने नहीं आया। मृतका के परिजनों के अनुसार मानो अस्पतालों में धरती के देव नहीं, दानवों की व्यवस्था सुदृढ़ है। जिला मुख्यालय बेतिया में स्वास्थ्य सुविधा के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल अरबों रुपए की लागत से तो बन गया, परंतु इस प्रकार की लापरवाही के कारण, किसी न किसी मरीज की आए दिन मौत हो जा रही है। आखिर इसके लिए दोषी कौन….? बिहार के सभी स्वास्थ्य मंत्री बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ होने का लाख दावा कर लें, धरातल पर चिकित्सकों, चिकित्सा कर्मियों और सुविधा के अभाव में रोगी दम तोड़ रहे हैं। अब तो यही लग रहा है कि सरकारी अस्पतालों में मरीज भाग्य भरोसे बच जाए तो वह ईश्वरीय कृपा। परंतु सरकारी व्यवस्था की कृपा आमजन को नहीं संभवतः शासन और प्रशासन को मिल रही है।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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