Tue. Jun 23rd, 2026

नंदिनी रोड शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर शनिवार को आंदोलनकारि ने मुख्यमंत्री के पते पर 2000 हजार पोस्टकार्ड भेजे। शराब दुकान हटाने आंदोलनकारी 58 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहा हैं। स्थानीय प्रशासन से निराश होने के बाद इन्होंने मुख्यमंत्री को ये पत्र भेजा है।

पार्षद पीयूष मिश्रा व स्थानीय लोगों के द्वारा लगातार 58 दिन से विरोध प्रदर्शन किया जा रहे है। छत्तीसगढ़ चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने बीते दिनों मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नंदिनी रोड स्थित शराब दुकान से हो रही परेशानी को लेकर अवगत कराया था। उसके बाद नगर निगम भिलाई में मुख्यमंत्री कार्यालय से पत्र भी भेजा गया है कि विवाद रहित जगह देखकर उक्त शराब दुकान को यहां से स्थानांतरित करने की कार्रवाई करें। पार्षद पीयूष मिश्रा का आरोप है कि प्रशासन के ऊपर राजनीतिक दबाव होने के कारण निगम प्रशासन इस ओर कार्रवाई करने से बच रहा है। सरकार के द्वारा शराब दुकानों के किराया के लिए मोटी रकम तय की गई है। जिसके चलते नंदनी रोड को शराब के वातावरण में ढकेल दिया गया है। प्रदर्शनकारियों के साथ आसपास के लोगों और मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों ने शनिवार को लगभग 2000 हजार पोस्ट कार्ड मुख्यमंत्री के नाम लिखकर भिजवाया गया। पोस्टकार्ड में लिखा गया है कि नंदिनी रोड शराब दुकान के कारण नंदनी रोड के आसपास का मोहला खराब हो चुका है। आप जल्द से जल्द इस दुकान को यहा से हटवाने का कष्ट करें।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया