Tue. Jun 23rd, 2026

इस लिस्ट में 3470 विद्यार्थियो के नाम है। neet में मिले अंकों के आधार पर मेरिट लिस्ट जारी की गई है। ये छात्र राज्य 9 सरकारी और 3 निजी मेडिकल कॉलेजों की 1570 और डेंटल कॉलेजों की 600 सीट में काउंसलिंग करा सकेंगे। पहली सूची के अनुसार मेडिकल की सीटों में कट ऑफ मार्क्स सामान्य वर्ग में 533 गई है। वहीं PWS (आर्थिक रूप से कमजोर) में 490, OPC में 531, S T में 422 और एससी में 331 अंक तक है। इस अंक तक पाने वाले विद्यार्थियों का एडमिशन राज्य के शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों में होना तय है। वहीं जिन छात्रों को सीट अपग्रेड करना है, वह दूसरा चरण की काउंसिलिंग में शामिल हो सकता हैं। इसके लिए उन्हें पहला अलॉट हुई सीट को रद्द करना होगा।

पहले चरण की काउंसिलिंग के बाद दूसरे चरण की काउंसिलिंग 9 नवंबर शाम 5.30 से शुरू होगी। उम्मीदवारों से ऑनलाइन ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। सीट अपग्रे डेशन के लिए नया आवेदन नहीं लिया जाएगे , बल्कि पहले से मिला ऑनलाइन आवेदन से ही उसे मान्यता किया जाएगा। राज्य में संचालित निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेज की सीटों में प्रवेश के लिए संचालक चिकित्सा शिक्षा के मार्गदर्शन में समिति बनाई गया है। समिति के सदस्यता ही निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों के सारे दस्तावेजा की जांच करेंगा और प्रवेश के नियम तथा पात्रता के अनुसार उम्मीदवारों से वांछित महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया पूर्णा कराएंगे। निजी कॉलेजों में प्रवेश के लिए पंजीयन शुल्क सभी वर्गों के लिए एक-एक लाख रुपए रखा गया है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया