Tue. Jun 23rd, 2026

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया स्थित काली बाग इमामबाड़ा वार्ड नंबर15 में ‘वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन ऑफ रिलीजन एंड नॉलेज’ ने निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया। जिसमें प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी इमामबाड़ा में लोगों की निःशुल्क जांच कर दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई। ज्ञात हो कि यह प्रतिवर्ष 12 रवि उल अव्वल अर्थात पैगंबर महम्मद की जयंती पर यह सेवा उपलब्ध कराई जाती है। मानवीय सेवा और मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने के लिए आपसी भाईचारा और सौहार्द के लिए, इस कार्य को किया जाता है। जिसमें बेतिया के सभी चिकित्सक निःशुल्क सेवा देकर लोगों की सहायता करते हैं। निःशुल्क चिकित्सा सेवा शिविर में डॉ पीके तिवारी, अमिताभ चौधरी, मोहम्मद हबीबुर रहमान, अनुराग मिश्र, डॉ डी मांझी, डॉ रमेश चंद्रा, डॉ सनी सिंह, डॉ.हंजला, डॉ अतहर हुसैन, डॉ अमरेश सिंह, डॉ साकेत, डॉ सुमैया शाद, डॉ खुशबू रानी, डॉ अलोका चंदन, डॉ. रश्मि शामिल हुए। इस संस्था के कार्यकर्ता मोहम्मद इरशाद आलम ने कहा कि यह करुणा का काम हमारे लिए सर्वोपरि है जैसे कि भूखे को खाना खिलाना, कंबल बांटना कहीं बच्चों को किताब कॉपी पेन देना हो इस तरह के काम हम लोग हमेशा करते हैं और साथ में उन्होंने यह भी कहा कि हम सब एक ईशवर की संतान हैं। निः शुल्क चिकित्सा शिविर को सफल बनाने में अंजार अहमद, मोहम्मद एनाम, इम्तियाज नासिर, अब्दुल्ला, शकील हैदर, शिबू, मोहम्मद गुफरान, शाहबाज, आदिल, ओसामा कार्यकर्ताओं की भूमिका प्रशंसनीय रही।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया