Fri. Dec 2nd, 2022

हिन्दी दिवस के अवसर पर शिक्षा स्नातक संकाय में हिंदी की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य की संभावना पर संगोष्ठी की सेमिनार का आयोजन किया गया । सेमिनार में अचच्चा दर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को मेंडल और प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया । इस  अवसर पर शिक्षा के व्याख्याता अतुल कुमार ने बताया कि हिंदी, हमारी सभ्यता, आस्था, भावना एवं संपर्क की भाषा है। हिंदी हमारी पहचान है यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान है। यह हमारी मातृभाषा है। हिंदी से पूरा देश एक सूत्र में बंधा दिखता है। प्रो. आलोक रंजन ने बताया कि हिंदी हिंदुस्तान की राष्ट्रभाषा ही नहीं बल्कि हिंदुस्तानियों की पहचान भी है। आज के आधुनिक युग में हमें अंग्रेजी भाषा भी सीखना जरूरी है लेकिन हमें अपनी मातृभाषा हिंदी को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें “हिंदी है हम वतन है” नारे का सम्मान करना चाहिए । नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि मातृभाषाओ की स्थिति में सुधार होगा । इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढाई भी अब हिन्दी में होगी ।.बीआईएड की हिन्दी की व्याख्याता प्रो. दिव्या वर्मा ने बताया कि राजेंद्र सिंह, हजारी प्रसाद द्विवेदी, काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त और सेठ गोविंद दास गोविंद जैसे लोगों ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा बनाए जाने के रपक्ष में कड़ी पैरवी की थी। भारतीय संविधान के आधार पर, अनुच्छेद 343 के अनुसार, हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया था। प्रियंका श्रीवास्तव ने बताया कि हमारी मातृभाषा हिंदी और देश के प्रति सम्मान दिखाने के लिए ही हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है।हिंदी के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि “जन्म हुआ मानवता का हां यही तो वह स्थान है, संस्कृत से संस्कृति हमारी, हिंदी से हिंदुस्तान है । भारत दुनिया में सबसे विविध संस्कृतियों वाला देश है, धर्म, परंपरा और भाषा में इसकी विविधता के साथ लोग एकता में विश्वास रखते हैं। 14 सितंबर 1949 को हिंदी भाषा को हमारे देश में सर्वोच्च दर्जा प्राप्त हुआ । प्रो. दिव्या वर्मा ने बताया कि हम सभी को आज के दिन यह प्रण लेना चाहिए कि हमें अपने दिलों में हिंदी भाषा संजो कर रखना चाहिए और अपने दैनिक जीवन में इसका प्रयोग अधिक से अधिक करते रहना चाहिए । मौके पर पिटू वर्मा उपस्थित थे

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply