Fri. Dec 2nd, 2022

आज ओपेक प्लस देशों की बैठक थी जिसमें ये फैसला किया गया कि अक्टूबर से 1 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती की जाएगी.

कच्चे तेल के दामों मे तेजी देखी जा रही है. दरअसल कच्चा तेल उत्पादन करने वाले देशों की संस्था ओपेक प्लस (OPEC+) ने अक्टूबर महीने में कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया है जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में उछाल देखा जा रहा है. कच्चा तेल 3.66 फीसदी की उछाल के साथ 96.42 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. 

दरअसल आज ओपेक प्लस देशों की बैठक थी जिसमें ये फैसला किया गया कि अक्टूबर से 1 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती की जाएगी. रूस इस फैसले के विरोध में था. ओपेक प्लस ने कहा कि जरुरत पड़ने पर वो फिर से बैठक बुला सकता है. 

बहरहाल ओपेक प्लस द्वारा कच्चे तेल के दामों में स्थिरता और उसमें ज्यादा गिरावट से रोकने के लिए ये फैसले लिया गया है. हालांकि ओपेक प्लस द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती भारत के बुरी खबर है. क्योंकि कच्चे तेल के दामों में इजाफा देखा जा सकता है कि जिससे देश में महंगाई बढ़ने के आसार हैं.  भारत दुनिया में कच्चा तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश है तो 80 फीसदी खपत के लिए आयात पर निर्भर है. कच्चा तेल महंगा हुआ तो सरकारी कंपनियों पर दवाब बढ़ेगा. उनका नुकसान बढ़ेगा. 

कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी से सरकारी तेल कंपनियों पर पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने का दवाब बनेगा. इससे पहले रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते जब कच्चे तेल के दाम बढ़े ते तो सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाने का निर्णय लिया था. 

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