Tue. Jun 23rd, 2026
शंभू नाथ तिवारी स्मृति फुटबॉल प्रतियोगिता के फाइनलमें
बेतिया: शंभू नाथ तिवारी स्मृति फुटबॉल प्रतियोगिता का फाइनल मैच टाउन क्लब नरकटियागंज और बीरगंज नेपाल के बीच खेला गया। मुख्य अतिथि विधायक रश्मि वर्मा ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया।
उच्च विद्यालय नरकटियागंज के प्रांगण में बीरगंज नेपाल और नरकटियागंज टाउन क्लब के बीच फाइनल मैच का जबर्दस्त मुकाबला हुआ। प्रारंभ से बीरगंज की टीम नरकटियागंज की टीम पर भारी पड़ती रही। बीरगंज की टीम ने एक पर एक लगातार चार गोल किया, अलबत्ता नरकटियागंज की टीम कोई गोल नहीं कर सकी। उत्कृष्ट प्रदर्शन की बदौलत बीरगंज नेपाल ने टाउन क्लब नरकटियागंज को शून्य के मुकाबले 4 गोल से रौंद दिया। इस प्रकार बीरगंज नेपाल की टीम ने शंभूनाथ तिवारी स्मृति फुटबॉल ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमा लिया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उप सभापति पूनम देवी, टाउन क्लब के अध्यक्ष वर्मा प्रसाद, प्रधानाचार्य डॉ. अरविन्द तिवारी, अवधेश तिवारी, भोट चतुर्वेदी, वैधनाथ प्रसाद, मेहीलाल प्रसाद, शिवकुमार सिंह, विंध्यवासिनी शुक्ल,  सत्यम श्रीवास्तव, संजय जायसवाल,  भोला शर्मा, सुरेन्द्र कुमार, विधायक प्रतिनिधि छोटन पाठक,  दीपक कुमार उर्फ दीपू रजक,  गुड्डू चौबे, सुजीत कुमार वर्मा उर्फ पिट्टू , रामाशंकर प्रसाद, अतुल कुमार, अखिल स्नेह श्रीवास्तव, अभिषेक तिवारी व अन्य उपस्थित रहे।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया