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इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में बुधवार को देश भर से चयनित उत्कृष्ट महिला किसान सम्मानित हुईं

नई दिल्ली : भारतीय किसान संघ देश का सबसे बड़ा किसान संगठन है। सम्पूर्ण भारत में 60 हजार से अधिक गांवों में ग्राम समितियां गठित है। जिनमें 42 लाख से अधिक महिला व पुरूष किसान कार्यकर्ता सक्रिय रुप से कार्य कर रहें है। जिसमें लगभग 7 लाख महिला किसान कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी है। भारत में बोआई, रोपाई, कटाई, खरपतवार नियंत्रण और पशुपालन जैसे 60 से 80 प्रतिषत कृषि कार्यों को महिलायें ही संभालती है। इसलिये हम कह सकते हैं कि वे कृषि की वास्तविक संचालक व रीढ़ हैं। महिला किसान पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कृषि ज्ञान, देशी बीजों के संरक्षण व जैव विविधता को बचाये रखने में सबसे अहम भूमिका निभा रही हैं। गौ कृषि वाणिज्यम की संकल्पना को मुर्तिरूप देने रसायनमुक्त अन्न के लिये “गौ आधारित जैविक खेती व प्राकृतिक खेती” को धरातल पर उतारने और परिवार व समाज के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महिलाओं की अग्रणी भूमिका है।
कृषि, दुग्ध उत्पादन व ग्रामीण हस्तशिल्प के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही है, बल्कि अब कृषि प्रबंधन व निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही है।जैसा बताया गया कि वर्ष 2026 को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किया गया है। भारतीय किसान संघ भारत में महिला किसानों की प्रतिष्ठा को समाज में किसान के रूप में स्थापित कराने, कृषि कार्य की चुनौतियों को उजागर करने के लिये अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन 30 सितंबर 2026 दिन बुधवार को इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया। सम्मान समारोह सुबह 9ः00 बजे से प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा गौ-पूजन, भगवान बलराम पूजन एवं ध्वजारोहण के उपरांत ‘हम भारत की नारियां वैभव लाएंगी’ के उद्घोष के साथ किया गया। सम्मेलन में देशभर के सभी प्रांतों एवं गांवों से हजारों की संख्या में मातृशक्ति किसानों ने भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. विमला डूँकवाल ने कहा कि भारत की नारी शक्ति, सृजन और संवर्धन का कार्य एक साथ करने में सक्षम है। नारी अन्नपूर्णा और दुर्गा का स्वरूप है, जो अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों का ध्यान रखती है। अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने सम्मेलन की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत में महिला किसानों की पारंपरिक तस्वीर को बदलने की आवश्यकता है। आज महिला किसान नई तकनीक और ऊर्जा के साथ परिवार और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सत्र को अखिल भारतीय अध्यक्ष के साईं रेड्डी, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई एवं मंत्री वीना सतीश ने भी संबोधित किया। समापन सत्र में अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि 2047 के विकसित एवं स्वस्थ भारत का संकल्प ‘गौ-कृषि-वाणिज्यम्’ और जैविक खेती के बिना संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज एवं अमृत आहारयुक्त नीति बनाने का आह्वान किया। अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर महिला किसान को प्रतिष्ठा मिलने से गांव, समाज और परिवार का गौरव स्वतः बढ़ेगा। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल, राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख रितु शर्मा सहित भारतीय किसान संघ के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए महिला किसानों को सम्मानित किया गया। जिसमें गौ-कृषि-वाणिज्यम् –सुनंदा सायसिंग (महाराष्ट्र), जैविक कृषि – दीपाली ओरांव (पश्चिम बंगाल),बीज संरक्षण – कमला बेन (गुजरात), ​पशुपालन – अंबा कालिंधी एवं पंपा गराई (पश्चिम बंगाल), रोजगार सृजन – पुष्पा सिंह (बिहार),​खाद्य प्रसंस्करण- माया सिन्हा महापात्रा (ओडिशा), सुलता चटर्जी एवं शुक्ला बैरागी (पश्चिम बंगाल) मुख्य हैं।
सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आई महिला किसान अपनी-अपनी प्रांतीय पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी नजर आईं। महिलाओं ने अपनी-अपनी भाषाओं में लोकगीत गाए एवं सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और ‘विविधता में एकता’ का मनमोहक दृश्य जीवंत कर दिया। सम्मेलन की विशेष बात यह रही कि इसमें शामिल होने आई महिला किसान किसी सहायता के बजाय अपने स्वयं के टिकट और खर्च पर दिल्ली पहुंचीं। विभिन्न सत्र में उन्होंने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की और सरकार से इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया।

 

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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