
पटना : कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में संस्थान अनुसंधान परिषद की तीन दिवसीय बैठक –2026 में पूर्वी भारत के लिए अनुसंधान योजना को नई दिशा देने के लिए विचार विमर्श किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में तीन दिवसीय (05-07 अगस्त, 2026) संस्थान अनुसंधान परिषद –2026 की बैठक शुक्रवार को सम्पन्न हो गया। बैठक का उद्देश्य संस्थान में संचालित अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना तथा राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नई अनुसंधान पहलों को अंतिम रूप देना रहा। तीन दिवसीय बैठक में संस्थान एवं इसके अधीनस्थ केन्द्रों के सभी वैज्ञानिकों ने भाग लिया और पूर्वी भारत की कृषि आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकता पर व्यापक विचार-विमर्श किया। चर्चा के प्रमुख विषयों में बहुविषयक एवं अंतर-संस्थागत अनुसंधान सहयोग, संरक्षण कृषि, धान परती क्षेत्रों का हरितीकरण, प्राकृतिक खेती, जलवायु-सहिष्णु फसल प्रणालियाँ, हरित ऊर्जा, जल उत्पादकता, फसल एवं पशुधन सुधार, मशीन लर्निंग, जलवायु-अनुकूल कृषि विकास आदि को बढ़ावा देना शामिल रहा।
बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. राकेश कुमार ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। उन्होंने अनुसंधान परियोजनाओं के उद्देश्यों को राष्ट्रीय कृषि प्राथमिकताओं के अनुरूप सुव्यवस्थित करने, अंतर-संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने परियोजनाओं के उद्देश्यों एवं कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने को महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने वैज्ञानिकों से “वन टीम, वन टास्क” की कार्य संस्कृति अपनाने तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बहुविषयक, प्रौद्योगिकी-आधारित एवं किसान-केंद्रित अनुसंधान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से जलवायु-स्मार्ट कृषि, समेकित प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, सौर ऊर्जा के उपयोग, उन्नत किस्मों के विकास, कटाई उपरांत प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन तथा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, जिससे पूर्वी भारत के लघु एवं सीमांत किसानों की उत्पादकता, लाभप्रदता, जलवायु अनुकूलन क्षमता एवं आजीविका सुरक्षा में वृद्धि हो सके। डॉ. दास ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य किसान समुदाय की सेवा करना तथा उनकी समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों से स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, टीम भावना के साथ कार्य करने तथा नवाचारी, उपयोगी एवं किसानोन्मुख प्रौद्योगिकियों के विकास पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान आने वाली चुनौतियाँ और बाधाएँ ही उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान की आधारशिला बनती हैं।
इस बैठक के दौरान विषय-विशेषज्ञ के रूप में , केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरुण पंडित ने समेकित कृषि प्रणाली, जल संसाधन प्रबंधन एवं बहुविषयक अनुसंधान के माध्यम से लघु किसानों के लिए विस्तार योग्य प्रौद्योगिकियों के विकास पर बल दिया। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, कोलकाता के प्रभारी डॉ. अर्नब सेन ने “वन हेल्थ” दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्नत आणविक, डिजिटल एवं परिशुद्ध कृषि तकनीकों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। बामेती, पटना के निदेशक डॉ. पी. के. मिश्रा ने अनुसंधान–विस्तार समन्वय, मांग-आधारित तकनीकों के विकास, किसानों की क्षमता निर्माण तथा डिजिटल माध्यमों से तकनीकी प्रसार को सुदृढ़ करने पर बल दिया। महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कार्बन तटस्थता, संसाधन संरक्षण, जलवायु-सहिष्णु कृषि एवं क्षेत्र-विशिष्ट तकनीकों के विकास हेतु संस्थागत समन्वय की आवश्यकता रेखांकित की। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. बिकास दास ने नवाचार एवं व्यावहारिक समाधानों के संतुलन के साथ उच्च मूल्य बागवानी, मूल्य संवर्धन तथा जलवायु-स्मार्ट एवं बाजारोन्मुख तकनीकों पर अनुसंधान को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। डॉ. अदलूल इस्लाम. प्रधान वैज्ञानिक, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आईसीएआर, नई दिल्ली ने पूर्वी भारत में जल बजट आधारित फसल नियोजन को बढ़ावा देने तथा इस दिशा में संस्थान द्वारा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास पर विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया।
तीन दिवसीय बैठक के दौरान पाँच प्रमुख विषयगत कार्यक्रमों के अंतर्गत संचालित 85 उप-अनुसंधान परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन आधारित परिशुद्ध कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग आधारित कृषि एवं पशुधन प्रबंधन, स्वदेशी पशु आनुवंशिक संसाधनों पर अनुसंधान, बकरी प्रजनन, पशुधन में मीथेन उत्सर्जन में कमी, रोग निदान, बायोफ्लॉक मत्स्य पालन तथा कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रभाव मूल्यांकन जैसे उभरते क्षेत्रों में नई अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी दी गई ।
बैठक के अंतिम दिन संस्थान प्रबंधन, परियोजना मूल्यांकन, विस्तार गतिविधियों, संसदीय विषयों, प्रशासन एवं वित्त से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके उपरांत आयोजित खुले विचार-विमर्श सत्र में वैज्ञानिकों ने विभिन्न सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संस्थान के कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ द्वारा गोद लिए गए गाँव में जनजातीय उपयोजना के अंतर्गत किए गए तकनीकी हस्तक्षेपों से प्राप्त उपलब्धियों एवं सफलता की कहानी पर आधारित एक वृत्तचित्र फिल्म का विमोचन किया गया। बैठक आईआरसी के सदस्य सचिव डॉ. पी. सी. चंद्रन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सम्पन्न हुआ।
