कृषि अनुसंधान परिसर पटना का कुशलाही में मत्स्य जागरुकता कार्यक्रम सम्पन्न

कुशलाही(रोहतास) : कृषि अनुसंधान परिसर पटना का कुशलाही में मत्स्य जागरुकता कार्यक्रम सम्पन्न हो गया। जिसमें वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन एवं मत्स्य स्वास्थ्य संरक्षण की उन्नत तकनीकों से अवगत कराया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा 3 जुलाई, 2026 को रोहतास जिला के करगहर प्रखण्ड अंतर्गत कुशलाही स्थित मत्स्य फार्म में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक दिवसीय मत्स्य पालन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनूप दास के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र के 35 मत्स्य पालक शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक तालाब प्रबंधन, मत्स्य स्वास्थ्य संरक्षण तथा उत्पादकता बढ़ाने वाली आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के क्रम में आईसीएआर-आरसीईआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. तारकेश्वर कुमार तथा वैज्ञानिक सुरेंद्र कुमार अहिरवाल ने किसानों को तालाब की उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने जल की गुणवत्ता बनाए रखने, घुलित ऑक्सीजनके स्तर की नियमित निगरानी, जल के पीएच (पीएच) संतुलन तथा प्राकृतिक प्लवक के विकास को प्रोत्साहित करने की वैज्ञानिक विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रदर्शित विधि को अपनाकर मछलियों की बेहतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है तथा अचानक होने वाली मृत्यु की घटनाओं को अत्यधिक सीमा तक रोका जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने मत्स्य रोग प्रबंधन पर विशेष बल देते हुए किसानों को परजीवी संक्रमण के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर उपचारात्मक उपाय अपनाने तथा रोगों की रोकथाम सम्बंधी वैज्ञानिक जानकारी दी। इसके साथ ही तालाब में फिंगरलिंग डालने से पूर्व मत्स्य बीज के उचित विसंक्रमण, तालाब में निर्धारित मात्रा में चूने के नियमित प्रयोग तथा स्वच्छ जल प्रबंधन की वैज्ञानिक विधियों से भी किसानों को अवगत कराया। इस क्रम में मत्स्य उद्यमी, मत्स्य फार्म संचालक एवं बिहार सरकार के पूर्व सचिव श्री दिनेश कुमार राय भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाते हुए आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं उपलब्ध सब्सिडी का समुचित लाभ उठाकर, वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप मत्स्य पालन अपनाकर तथा बेहतर विपणन एवं आपूर्ति श्रृंखला विकसित कर इस क्षेत्र को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ उद्यम बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर मत्स्य पालन से सम्बंधित अपनी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। किसानों ने वैज्ञानिकों द्वारा साझा की गई जानकारी को उपयोगी बताते हुए इसे अपने मत्स्य पालन कार्यों में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। आईसीएआर-आरसीईआर के वैज्ञानिकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, उत्पादकता में वृद्धि करने तथा किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
