Wed. Jun 24th, 2026

राहुल गांधी ने अमेठी को भारत का पहला विमानन विश्वविद्यालय का उपहार दिया

अमेठी: राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में नेता प्रतिपक्ष/ सांसद राहुल गांधी एवं अमेठी सांसद किशोरीलाल शर्मा के प्रोटोकाल का सुनियोजित अनादर की जानकारी मिलते ही अमेठी कांग्रेसजनों ने आक्रोश व्यक्त किया है। राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय की स्थापना 2013 में राहुल गांधी ने सदन से पास कराकर, अमेठी सहित देश-प्रदेश एवं बड़े उद्योगों को अमेठी से सीधे जोड़ने का एक विशाल संस्थान स्थापित कराने का शुभारम्भ किया।

विगत कुछ माह पहले ही अमेठी सांसद किशोरीलाल शर्मा ने सदन में विमानन विश्वविद्यालय के मुद्दे को उठाया, तो संस्थान के कार्य में बड़ी प्रगति हुई। नये कुलपति की नियुक्ति भी तत्काल कर दी गयी। केन्द्र सरकार की अमेठी जनमानस के प्रति लगातार सौतेला व्यवहार से संस्थान के जिम्मेदार पदाधिकारी भी दीक्षांत समारोह में नेता प्रतिपक्ष व अमेठी सांसद के प्रोटोकाल का पालन न करके, सांसद ही नहीं बल्कि अमेठी की जनभावनाओं का अपमान किया है।

उपर्युक्त जानकारी मिलते ही सांसद अमेठी के कार्यालय प्रभारी, बृजेश तिवारी ने जब विमानन विश्वविद्यालय के जिम्मेदार पदाधिकारियों से सम्पर्क किया, तो उन्होंने बताया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी व अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा को कार्यक्रम मंच पर जगह नहीं है, वे प्रथम पंक्ति में बैठ सकते हैं। ऐसे संवैधानिक प्रोटोकाल असंज्ञेय (संसदीय) पदाधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई, क्योंकि नेता प्रतिपक्ष एवं क्षेत्रीय सांसद की गरिमा की अवहेलना अति निंदनीय है।

इन्दिरा गांधी उड़ान अकादमी फुरसतगंज के सिल्वर जुबली कार्यक्रम के दौरान 2011 में अमेठी सांसद रहे राहुल गांधी विमानन विश्वविद्यालय बनवाने की बात कही, इसका 2013 में शिलान्यास हुआ।केन्द्र सरकार के इशारे पर इस घिनौने कृत्य से अमेठी जनमानस अपने को अपमानित महसूस कर रहा है। अमेठी की जनता के साथ-साथ प्रबुद्धजनों एवं सामाजिक संगठनों में संस्थान के प्रति काफी रोष व्याप्त है।  उपर्युक्त जानकारी अनील सिंह प्रवक्ता जिला कांग्रेस कमेटी ने दी

 

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया