Wed. Jun 24th, 2026

बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमला भारतीय सनातन हिंदुत्व को चुनौती : श्यामानंद

पटना: बंगलादेश में गदर के बीच अल्पसंख्यक हिंदुओं का नरसंहार, मंदिर में आगजनी, तोड़-फोड़, मार-काट भारतीय सनातन संस्कृति पर हमला है। हिंदुत्व को खुल्लम-खुल्ला चुनौती है। भारत सरकार बंगलादेश में हिंदुओं के कत्लेआम को रोकने के लिए तत्काल उचित कार्रवाई करें। कारगर कदम उठाए और हिंदू, हिंदुत्व, और सनातन की रक्षा करें। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्यामानंद महाराज ने मांग किया है कि बंगलादेश के अल्पसंख्यक हिंदुओं को भारत में प्रवेश दिया जाए और हिंदुत्व की रक्षा किया। बांगलादेश में अब तक 100 से अधिक हिंदू मारे जा चुके हैं। लोक गायक राहुल अनदा के घर हमला हुआ है। इस्कॉन मंदिर जला दिया गया, दो हिंदू पार्षदों को भी मार डाला गया। उपद्रवियों की भीड़ में रंगपुर सिटी के पार्षद हरधन राय हारा के घर पर हमला कर उनकी निर्मम और नृशंस हत्या कर दी गई। बंगलादेश की स्थिति बहुत ही भयावह है और वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं को जान के लाले पड़े हुए हैं।  सनातन संस्कृति के लंबरदारों से श्यामानंद ने अपील किया हैं कि वह एकजूट होकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं और बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और अनाचार के विरोध में सड़क से संसद तक प्रतिरोध करें ।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया