Wed. Jun 24th, 2026
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन, चुनाव कार्यों को ससमय निष्पादित करना सुनिश्चित करें: दिनेश कुमार राय
बेतिया। जिला निर्वाची पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी दिनेश कुमार राय ने जिला निर्वाचन शाखा का औचक निरीक्षण किया तथा पदाधिकारियों एवं कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया।
जिला निर्वाची पदाधिकारी ने कहा कि लोकसभा निर्वाचन को सफलतापूर्वक सम्पन्न सम्पन्न कराना है। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन करते हुए सभी कार्यों को ससमय निष्पादित करना है। कार्यों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, शिथिलता एवं कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि आयोग को ससमय प्रतिवेदन उपलब्ध हो, इसे हर हाल में सुनिश्चित किया जाय। सभी संचिकाओं एवं अभिलेखों को अद्यतन रखा जाय। निर्वाचन शाखा के सभी पदाधिकारी एवं कर्मी गोपनीयता बनाये रखेंगे। अनाश्यक रूप से लोगों का जमावड़ा कार्यालय में नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखें। इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी बेतिया सदर विनोद कुमार, उप निर्वाची पदाधिकारी लालबहादुर राय, अवर निर्वाचन पदाधिकारी यशलोक रंजन, विशेष कार्य पदाधिकारी जिला गोपनीय शाखा सुजीत कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया