Wed. Jun 24th, 2026

बिहार में एक और सीट पर रोचक मुकाबला की संभावना

रिपोर्ट अनमोल कुमार

पटना: बक्सर में पिछले कई महीने से आनंद मिश्र लोगों से मिल रहे हैं। माना जाता रहा कि उन्हें भाजपा से टिकट मिल सकता है, अलबत्ता उनकी जगह भाजपा ने मिथलेश तिवारी पर विश्वास किया है। ऐसे में आनंद मिश्र ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। आनंद मिश्र के अनुसार “कुछ लोगों के कारण बीजेपी की सदस्यता नहीं मिल पाई, लेकिन अब बक्सर से वापसी संभव नहीं है। बता दें कि आनंद मिश्रा ने बीजेपी से टिकट मिलने की आस में वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) लिया। आनंद मिश्रा 2011 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के पदाधिकारी रहे हैं।

2011 बैच के आईपीएस रहे आनंद मिश्रा मूल रूप से भोजपुर जिला के शाहपुर थाना क्षेत्र के प्रसौंडा गांव निवासी हैं। हालांकि उनका पूरा परिवार कोलकाता में रहता है। आनंद मिश्र की शिक्षा दीक्षा भी कोलकाता में ही हुई। केवल 22 वर्ष की आयु में आईपीएस बन कर सुर्खियां बटोरनेवाले आनंद मिश्रा असम के लखीमपुर में एसपी के रूप में तैनात रहे, जहां उनकी गिनती तेज तर्रार पुलिस पदाधिकारी के रूप में होती रही। बीजेपी से टिकट मिलने की आस में उन्होंने जनवरी 2024 में वीआरएस ले लिया। इसमें उन्हें निराशा हाथ लगी और बीजेपी से टिकट नहीं मिला। ऐसी परिस्थिति में आनंद मिश्रा बक्सर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकने को तैयार हैं।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया