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बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला में कार्यरत सर सैयद एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट ने अनुमंडल मुख्यालय नरकटियागंज के एफ के मैरेज हॉल धूमनगर में सर सैयद डे 2026 का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता डॉ अफताब आलम ने किया, जबकि संचालन डॉ नसीम अहमद ने किया। डॉ अफताब आलम ने ट्रस्ट के क्रियाकलापों का विवरण प्रस्तुत किया। अपने सम्बोधन में डॉ आलम कहा कि सर सैयद अहमद खां की शिक्षा की मशाल और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का सफर बुलंदी पर है। डॉ अफताब आलम ने एसएसबी 44 वीं वाहिनी के सेनानायक बलवंत सिंह नेगी, पूर्व प्राचार्य छोटे लाल प्रसाद डॉ जावेद कमर, डॉ नौशेर आलम, डॉ जफर कमाल अंजुम, डॉ शौकत अली, डॉ नौशाद आलम, डॉ नसरुल्लाह, मास्टर कलीम, डॉ फैसल सिद्दीकी, फखरे आलम, आफताब आलम, सुधांशु शेखर, पत्रकारों में डॉ अमानुल हक, अवधेश कुमार शर्मा, संजीव कुमार श्रीवास्तव, फजल उर रहमान, म.गुलाम साबिर, दिलशाद अहमद को सम्मानित किया।
सर सैयद अहमद खां की 209 वीं जयंती पर विचार व्यक्त करने वाले वक्ताओं में जावेद कमर, ज़फर कमाल अंजुम, ओजैर अंजुम, फखरे आलम, अकील मुस्ताक, जावेद आलम, म. शहाबुद्दीन, डॉ नौशेर आलम मुख्य हैं। सर सैयद डे 2026 के मौका पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए सर सैयद की जीवनवृत्त बताया।वक्ताओं ने कहा कि मुगल दरबार से जुड़े एक संभ्रांत परिवार में दिल्ली में 17 अक्टूबर 1817 को हुआ। सर सैयद का जन्म सैयद मुहम्मद मुत्तकी व अजीज-उन-निसा के घर में हुआ। उनके पिता सैयद मुहम्मद मुत्तकी मुगल सम्राट अकबर शाह द्वितीय के निजी सलाहकार और अत्यंत नज़दीकी व्यक्ति रहे, उनकी माँ अत्यंत संभ्रांत और अनुशासित महिला रही, जिनका सर सैयद के प्रारंभिक जीवन, शिक्षा और संस्कारों पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। सर सैयद अहमद खान (17 अक्टूबर 1817) 19वीं सदी के एक महान भारतीय मुस्लिम सुधारक, दार्शनिक और शिक्षाविद रहे। उन्हें आधुनिक भारत में मुसलमानों के बीच आधुनिक शिक्षा की नींव रखने वालों में एक माना जाता है। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन न्यायिक और प्रशासनिक सेवा में काम किया और बाद में जज (मुंसिफ) बने। ब्रिटिश हुकूमत ने उनकी वफ़ादारी से खुश होकर, उन्हें 1888 में ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया। गाजीपुर में वैज्ञानिक समाज साइंटिफिक सोसाइटी (1864) की स्थापना किया, जिसका उद्देश्य पश्चिमी विज्ञान और साहित्य का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करना रहा। सामाजिक सुधार और मुस्लिम समुदाय में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए तहज़ीबुल अखलाक़ (1870) नामक प्रसिद्ध पत्रिका का प्रकाशन किया। अलीगढ़ में मोहमडन ओरिएंटल कॉलेज (1875) की स्थापना किया, जो बाद में वर्ष 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयु) के रुप में विकसित हुआ। उन्होंने ‘असबाबे बगावते हिन्द’ (1857 के विद्रोह के कारण), ‘आसारुससनादीद’ और ‘खुत्बाते अहमदिया’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना किया। कार्यक्रम में देर शाम कवि सम्मेलन भी हुआ। उन्होंने 27 मार्च 1898 को उन्होंने अपनी जीवन यात्रा पूर्ण किया। सर सैयद अहमद खां की 209 वीं जयंती पर आयोजित मुशायरा में मारुफ शायर जाकिर हुसैन, आरिफ लखनवी, डॉ शबा शोख, डॉ नसीम अहमद नसीम, कलीमुल्लाह कलीम, फ़सीह अख्तर ने अपनी शायरी से कार्यक्रम का रौनक बढ़ाया।
