Wed. Jun 24th, 2026
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की फुटबॉल टीम चयनित, अच्छा प्रदर्शन करेगी टीम: कांतेश सिंह
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बेतिया: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय फुटबॉल टीम की घोषणा सोमवार को कांतेश सिंह सचिव क्रीड़ा परिषद बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने किया। विश्व विद्यालय के लिए चयनित टीम कोलकाता विश्वविद्यालय में आयोजित पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में भाग लेने 19 नवम्बर 2024 को मिथिला एक्सप्रेस से प्रस्थान करेगी। तारकेश्वर प्रसाद वर्मा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सुरेंद्र राय ने सभी खिलाड़ियों को सम्मान में विदाई समारोह आयोजित किया। विश्वविद्यालय टीम में चयनित खिलाड़ियों में गोविंद कुमार, रोहित राज, रेहान सिद्दीकी, महताब आलम, साजन कुमार, मुंशी सिंह महाविद्यालय मोतिहारी, अभिषेक गिरी एसआरपी कॉलेज चकिया, पप्पू कुमार एलएस कॉलेज मुजफ्फरपुर, कुणाल कुमार रामेश्वर सिंह कॉलेज मुजफ्फरपुर, उमेश उरांव राम लखन सिंह यादव कॉलेज बेतिया, वीरेंद्र कुमार, प्रशांत कुमार, प्रभाष कुमार, अखिलेश उरांव, विशाल कुमार, राजु काजी, रविरंजन कुमार, अंकित कुमार तारकेश्वर प्रसाद वर्मा महाविद्यालय नरकटियागंज से संबद्ध हैं। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय फुटबॉल टीम के प्रशिक्षक सुनील वर्मा ने कहा है कि टीम संतुलित है, इस सत्र में अच्छा प्रदर्शन करेगी।
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By Awadhesh Sharma

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया