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ईश्वर सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सच्चिदानंद स्वरुप, आदि-अनन्त है, ना तस्य प्रतिमास्ति : आर्य समाज
विश्व कल्याण महायज्ञ, आर्य समाज मंदिर नरकटियागंज, वेदों की ओर लौटो, स्त्री ही ब्रह्म है : आर्य समाज 

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के अनुमंडलीय शहर नरकटियागंज स्थित आर्य समाज मन्दिर परिसर में विश्व कल्याण महायज्ञ के प्रवचन के 5 वीं रात्री अंबाला की विदुषी श्वेता आर्या ने भजनोपदेश से समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए, नारी शक्ति और भद्र आर्यों को वैदिक धर्म की ओर लौटो, नारा को चरितार्थ किया और जागृति का बिगुल फूंका।

तत्पश्चात लखनऊ की विदुषी निष्ठा विद्यालंकार ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में नारी शक्ति के योगदान पर विचार व्यक्त करते हुए, नारियों में आत्म विश्वास भर दिया। उन्होंने कहा कि नारी जाति के सम्मान से राष्ट्र का कल्याण सम्भव है। जिससे राष्ट्र आर्थिक समृद्धि को प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि धर्म के ठिकेदारों ने नारी जाति का अपमान किया है ।नारी जाति ने सृष्टि की रचना की उसका अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है। महर्षि दयानंद सरस्वती ने पाखंड में डूबे  भारत को सत्यार्थ प्रकाश (द लाइट ऑफ ट्रुथ) प्रदान किया। विश्व कल्याणार्थ महर्षि दयानंद सरस्वती ने देश में समाज सुधार आंदोलन की कड़ी में ‘आर्य समाज’ की प्रचंड ज्योति जलाया। महर्षि ने नारी जाति के उत्थान के लिए कार्य किया। देश में नई क्रांति का सूत्र पात हुआ। महर्षि दयानंद सरस्वती ने उस समय नारी उत्थान और कल्याण की बात किया, जब धर्म के कथित मर्मज्ञों ठिकेदारों ने नारी जाति का अपमान पैर की जूती कह कर किया। महर्षि दयानंद सरस्वती ने वेदों की  ओर लौटो का संदेश दिया और कहा कि स्त्री ही ब्रह्म है, इसलिए ब्रह्म का सम्मान करें।
जयपुर के आर्य विद्वान सच्चिदानंद ने सर्वाधिक प्रहार पाखंड पर किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की आराधना अवश्य करें, किंतु ढोंग, आडंबर और पाखंड से दूर रहें।
संदीप आर्य गिल ने करवां चौथ व्रत पर कहा कि भूखे रहने से नहीं कम बोलने से पतियों की आयु में वृद्धि होती है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन करने से भ्रांतियों से मुक्ति मिलेगी। गिल का भजनोपदेश ‘प्यारे ऋषिवर तेरा जवाब नहीं, जीवन तो एक झमेला है, नारी शिक्षा पर जो झगड़ते थे, बेटियों को नहीं पढ़ाते थे, और बेटो को शिक्षा देते थे। ऋषिवर ने समाज को बदला, नारी शिक्षा को को दी पहचान दयानंद सरस्वती थे वह व्यक्ति महान.…तेरी बातों में दम था आया बदलाव…. तेरे आने पहले पतझड़ था तूने बदला इसे बहारों में.… ने खूब प्रशंसा बटोरी। उनके पूर्व स्वामी सच्चिदानंद ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रकाश डाला।
आर्य प्रवाचकों ने स्वामी दयानंद सरस्वती ने नारी उत्थान, नारी कल्याण, नारी शिक्षा, दलित से ईसाई और मुस्लिम बने लोगों का दलितोद्धार करना सिखाया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज को छिन्न-भिन्न करने के लिए जिन लोगों ने जन्म को जातीय आधार बनाया वे स्वयं हासीये पर आ गए। यदि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना नहीं किया होता तो संभवतः हम यहां नहीं होते।
बताया गया कि आर्य समाज राम, कृष्ण का विरोध नही करता, वे मर्यादा पुरुषोत्तम और योगेश्वर कृष्ण हैं, किंतु ईश्वर नहीं है। पृथ्वी पर जन्म लेने वाले की मृत्यु सुनिश्चित है, जबकि ईश्वर अजन्मा और अनंत है।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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