Tue. Jun 23rd, 2026
वैदिक संस्कृति ध्वस्त करना पाश्चात्य संस्कृति का षड़यंत्र है
बेतिया: विश्व कल्याण महायज्ञ के 5 वें रात्री ख्याति प्राप्त बिद्वान स्वामी सचितानन्द महराज ने विचार व्यक्त करते हुए, वैदिक धर्म में कहीं कोई अछूत नहीं है। भारतीय समाज में जितने छुआछूत हैं, सभी वेद विरुद्ध है। छुआछूत विदेशी लुटेरों व आक्रन्ताओं, मुख्यतः मुग़ल शासको की देन है, क्योंकि चारो वर्ण की रचना जाति आधारित नहीं बल्कि कर्म व गुणधर्म आधारित होती रही। वैदिक धर्म अध्यात्म को आत्मसात करने का माध्यम है, स्वामी दयानंद सरस्वती के सत्यार्थ प्रकाश का अध्ययन कर भारतीय समाज को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।दलित समाज हिन्दू वैदिक धर्म का अभिन्य अंग है, रामायण काल से लेकर आज तक दलित समाज ने अपनी भक्ति एवम निष्ठा से वैदिक धर्म को समृद्ध करने का कार्य किया है। सामाजिक सनातनीयों कि एकता भाईचारा को मजबूत कर धर्मान्तरण किसी भी सडयंत्र को विफल किया जा सकता है। निषाद राज को गले लगाने वाले और सबरी के जूठे बैर खाने वाले ऐसी परम्परा के वाहक वैदिक संस्कृति युक्त समाज मे छुआछूत का कोई प्रश्न नहीं है
 विदेशी मुगलो के काल मे जबरन छुआछूत पैदा किया गया और हमारे समाज मे फुट डालकर हमारा धर्म परिवर्तन कराया गया। विभिन्न प्रकार के लालच और चमत्कार के माध्यम से भोली भाली अशिक्षित वर्ग लाया गया और उनका धर्म परिवर्तन किया गया। वैदिक संस्कृति वाले समाज को उंची नीची जाति में बांट कर समाज को कमजोर, उनके एकमात्र मातृभूमि परम वैभवशाली भारत को समाप्त करने का षड्यंत्र, हमारे देश में तीव्र गति से बढ़ता जा रहा है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में आवश्यकता है कि हम सभी वैदिकधर्मी को एक मंच पर धर्मांतरण के षड्यंत्र को विफल करने की, भारत भूमि के पवित्र भूमि पर अनेक ऋषियो, विभूतियों, महापुरुषो का समयानुकूल पदार्पण हुआ  जिसमें दयानन्द सरस्वती ने वर्षो पूर्व से चले आ रहे पाखंडो कुरुतियों और धर्म परिवर्तन पर प्रहार किया। जिसके कारण आर्य समाज ने शुद्धिकरण अभियान संचालित किया। प्रवाचिका विद्यालंकार लखनऊ श्वेता आर्या, भजनोपदेशिका, अंबाला के पंडित संदीप आर्य गिल भजन उपदेशक, मेरठ के प्रो. दीपेंद्र आर्य विद्यालंकार पटना यूनिवर्सिटी ने अपना भजन उपदेश से आर्यजनों को जागृत करने का कार्य किया। क्षेत्रीय गायक अनुप कुमार साहनी के भजन पर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया