Thu. Jan 15th, 2026

सबके मन में काम वासना फिर कैसे खुशहाली हो
स्वागत तब हम करे कृष्ण का ह्दय सिंहासन खाली हों
एक तख्त पर दो महाराजा, आसन नही जमाते है
एक कामजीत एक ज्ञान रहित आपस में ही टकराते है
बैकुण्ठनाथ की दुनियां में जब सुन्दर सुखद द्वारिका हो
मनमोहक सुन्दर झांकी हो राधा जैसी मलिका हो
सत्य प्रेम के चंन्दन से वह तिलक लगाने वाली हो
स्वागत तब हम करे कृष्ण का ह्दय सिंहासन खाली हों

 

Spread the love

Leave a Reply