Tue. Jun 23rd, 2026

सोमवार को छत्तीसगढ़ बंद होने के बाद भी  मंगलवार को भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार के विरोध जमकर नारेबाजी किया गया । उन्होंने शहर के प्रमुख  चौराहों पर मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का पुतला जलया गया । इस दौरान उनकी पुलिस से आवेश और क्रोध में की जाने वाली भी हुई। भाजपा भिलाई के जिलाध्यक्ष बृजेश बिचपुरिया के नेतृत्व में भाजपा और भाजयुमो के कार्यकर्ताओं ने सुपेला गदा चौक में विरोध प्रदर्शन किया। श्रीराम जन्मोत्सव समिति युवा विंग के अध्यक्ष मनीष पाण्डेय ने भिलाई सिविक सेंटर में उग्र प्रदर्शन किया। यहां पुतला जलया गया   कइस  दौरान भाजपाइयों और पुलिसवालों में मारकर छीनने  भी हुई।

प्रदर्शनकारियों और थाना प्रभारी मनीष पाण्डेय के बीच इतनी खींचतान हो गई कि स्थिति मारपीट तक की आ गई। बाद में भिलाई निगम के नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा और पार्षद पीयूष मिश्रा सहित अन्य भाजपायों ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया। पुलिस भाजपायों को पुतला दहन करने से नहीं रोक पाई।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया