Mon. Jun 22nd, 2026

जवाहरपुर योजना में खाली पड़ी 3800 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध मकान व दुकान बन गए थे। इस जमीन को खाली कराने के लिए एडीए ने बुलडोजर चला दिया। इस दौरान अफरा-तफरी का माहौल रहा। 

आगरा विकास प्राधिकरण ने जवाहर पुरम योजना में आठ करोड़ रुपये की कीमत की 3800 वर्ग मीटर भूमि बृहस्पतिवार को 32 साल बाद कब्जा मुक्त कराई। पुलिस व प्रशासन की मौजूदगी में अवैध निर्माण बुलडोजर से ढहा दिए। एडीए की खाली पड़ी भूमि पर कब्जा कर अवैध रूप से मकान व दुकानें बना ली गईं थीं। वर्ष 1988 में एडीए ने जवाहर पुरम योजना विकसित करने के लिए भूमि अधिग्रहण किया था। खसरा संख्या 168 व 169 में 20 हजार वर्ग मीटर से अधिक भूमि थी। जिस पर कागजों में एडीए का कब्जा था। कागजों में कब्जा लेने के बाद विकास प्राधिकरण के अफसर आंख मूंदे रहे। उधर, खाली पड़ी 3800 वर्ग मीटर भूमि पर अवैध निर्माण, मकान व दुकान बन गई। बाकी भूमि पर एडीए पहले ही व्यावसायिक एवं रिहायशी भूखंड बना कर विक्रय कर चुका था। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष चर्चित गौड़ को एडीए की भूमि पर कब्जे की शिकायत मिली। जिसके बाद उन्होंने सचिव को पुलिस व प्रशासन के सहयोग से सरकारी भूमि का कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिए।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया