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पटना: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 27 से 30 अक्टूबर 2026 तक आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम “समेकित कृषि प्रणाली” का श्रीगणेश किया गया। कृषि प्रौद्योगिकी प्रबन्ध अभिकरण (आत्मा), कैमूर द्वारा प्रायोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कैमूर जिला के 35 किसान शामिल हैं। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को समेकित कृषि प्रणाली की विभिन्न तकनीकों से अवगत कराकर फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मत्स्यपालन, बागवानी एवं अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को एकीकृत रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उत्पादन लागत कम कर सकें, आय एवं रोजगार के अवसर बढ़ा सकें तथा खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ एवं जलवायु अनुकूल बना सकें। प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं जैसे छोटी जोत, संसाधनों की कमी, कम उपज से वैज्ञानिकों को अवगत कराया और प्रशिक्षण से जुड़ी अपनी अपेक्षा पर प्रकाश डाला। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि समेकित कृषि प्रणाली किसानों की आय में स्थिरता लाने, उत्पादन सम्बंधित खतरा कम करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभााने पर बल दिया है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के क्रम में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को अपने खेतों में अपनाने और स्थानीय परिस्थितियों केअनुरुप कृषि की विविध गतिविधियों को एकीकृत करने का आह्वान किया। डॉ. संजीव कुमार, पाठ्यक्रम निदेशक एवं प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान प्रभाग, ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुये बताया कि किसान किस प्रकार समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर विभिन्न कृषि घटकों के बीच समन्वय तथा उपलब्ध संसाधनों के उत्तम उपयोग से कम भूमि से अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग, ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में भूमि एवं जल संसाधनों का दक्षतापूर्वक उपयोग अनिवार्य है, जिसमें समेकित कृषि प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डॉ. कमल शर्मा, प्रमुख, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन प्रभाग ने समेकित कृषि प्रणाली के अंतर्गत कृषि अपशिष्टों के पुनर्चक्रण से कृषि लागत में न्यूनता पर बल दिया। इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. शिवानी, प्रधान वैज्ञानिक सह पाठ्यक्रम समन्वयक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने किसानों को समेकित कृषि प्रणाली की महत्ता बताते हुए इस प्रशिक्षण की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ अभिषेक कुमार, वैज्ञानिक सह पाठ्यक्रम समन्वयक ने समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न घटकों के एकीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला।
चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के क्रम में प्रतिभागियों को समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न पहलु यथा फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन, पशुधन प्रबंधन, मशरूम उत्पादन, चारा उत्पादन, मत्स्य प्रबंधन, मुर्गी एवं बत्तख पालन, तालाब एवं सिंचाई प्रबंधन, केंचुआ खाद, अपशिष्ट पुनर्चक्रण के बारे में व्यवहारिक ज्ञान एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवानी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभिषेक कुमार ने प्रस्तुत किया।
