
अंचल कार्यालय के फर्जीवाड़ा में 62.5 डिसमिल भूमि में 9.5 डिसमिल घट कर केवल 53 डिसमिल रह गया, प्रमण्डलीय आयुक्त ने पूछा 9.5 डिसमिल शेष भूमि कहाँ……….?
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बेतिया : वैसे तो पश्चिम चम्पारण जिला में भूमि का फर्जीवाड़ा व्यापक पैमाने पर हुआ है, किन्तु जो मामला उजागर हुआ है, उसमें प्रमण्डलीय आयुक्त ने दंडात्मक कार्रवाई का निदेश दिया है। पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय स्थित बेतिया अंचल में जमाबंदी फर्जीवाड़ा मामला में तिरहुत प्रमण्डल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह कड़ा कदम उठाया है। उनके गंभीरता से बेतिया अंचल के पूर्वी करगहिया की जमाबंदी संख्या 105 में धाँधली के विरुद्ध कड़ा निर्देश दिया है। गौरतलब है कि तिरहुत प्रमण्डल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने दोषी कर्मियों के विरुद्ध काण्ड अंकित करने का निदेश जिला पदाधिकारी को दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। बेतिया अंचल के पूर्वी करगहिया मौजा की जमाबंदी लगभग 50 वर्ष से अधिक समय से परिवादी के पिता के नाम पर अंकित बताई गई है, जिसका नियमित लगान भी जमा किया जाता रहा। आरोप है कि बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश के उस जमाबंदी को अचानक शून्य कर दिया गया और पूरी भूमि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर ऑनलाइन चढ़ा दी गई। सबसे बड़ा आश्चर्य और चौंकाने वाला तथ्य यह कि पूर्व से मूल जमाबंदी पाँच एकड़ अर्थात 62.5 डिसमिल भूमि की रही, किन्तु अंचल कार्यालय के फर्जीवाड़ा में वही भूमि 9.5 डिसमिल घट कर केवल 53 डिसमिल बना दिया गया। प्रमण्डलीय आयुक्त ने प्रश्न किया कि शेष 9.5 डिसमिल की शेष भूमि कहाँ गई ? प्रमण्डलीय आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि प्रथमदृष्टया व्यक्तिगत लाभ से प्रेरित एक पूर्णतः आपराधिक कृत्य प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशानिर्देश के बावजूद, लंबे समय से जमाबंदी को बिना अदालती आदेश के रद्द करना पूरी तरह विधि विरुद्ध है। अतः आयुक्त ने निर्देश दिया कि अवैध ढंग से अंकित जमाबंदी को अविलंब ठीक कर पुनः वास्तविक व्यक्ति के नाम पर सुनिश्चित करें। सम्पूर्ण प्रकरण में उत्तरदायित्व निर्धारित करने के लिए प्रमण्डलीय आयुक्त ने पश्चिम चम्पारण जिला के जिला पदाधिकारी, अपर समाहर्ता (राजस्व) और बेतिया अंचल के सीओ को 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे सभी साक्ष्य व प्रतिवेदन के सतह उपस्थित होने को कहा है। उन्होंने यह रिपोर्ट भी माँगा है कि किस पदाधिकारी के आदेश पर उपर्युक्त फर्जीवाड़ा हुआ और उसमें किन-किन कर्मचारियों की भूमिका रही है। आयुक्त ने तिरहुत प्रमण्डल के सभी जिला के राजस्व पदाधिकारियों को कड़ी चेतावनी दिया है कि वे सरकारी नियम अंतर्गत ही कर्त्तव्य दायित्व के साथ कार्य का निष्पादन करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राजस्व मामला में किसी प्रकार की शैथिल्यता अथवा भू-माफिया के साथ मिली भगत अक्षम्य होगा। ऐसे में दोषियों केविरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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