Wed. Jun 24th, 2026
चरस व बाइक बरामद, पश्चिम बंगाल के दो युवक गिरफ्तार
apnibaat.org
मझौलिया : प्रखंड अंतर्गत चीनी मिल से नानोसती रोड के तीन मोहानी पर एक होंडा एचपी बाइक सवार दो व्यक्ति को पुलिस के रोकने पर दोनो व्यक्ति गाड़ी घूमा कर भागने के प्रयास पर के क्रम में दोनो व्यक्तियों को रोककर नाम पता पूछा गया तो एक व्यक्ति ने अपना नाम राहुल ग्वाला उम्र 30 वर्ष पिता रंजीत ग्वाला तथा दूसरे व्यक्ति ने अपना टिंकू ग्वाला उम्र 23 वर्ष पिता अशोक ग्वाला दोनो ग्राम फटापोखर थाना राजगंज जिला जलपाईगुड़ी पश्चिम बंगाल बताया। बाइक की जांच के क्रम में चोरी का पाया गया तथा पिछे बैठे व्यक्ति टिंकू ग्वाला के बैग से 1 किलो 38 ग्राम चरस बरामद हुआ। बरामद चरस के बारे में पूछने पर गिरफ्तार दोनो युवक ने बताया कि चरस हम लोग नेपाल से खरीदकर उत्तरप्रदेश बेचने के लिए ले जा रहे हैं। दोनो के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज न्यायालय को सौंप दिया गया है। उपर्युक्त जानकारी इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र मीडिया को दी।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया