Wed. Jun 24th, 2026
पंचायत में माफी मांगना, सहन नहीं करने वाले युवक ने आत्महत्या किया
बेतिया : दो पक्ष के बीच हुए विवाद में पंचायत के क्रम में माफी मांगने की बात सहन नहीं कर सका युवक। वह युवक अपने जीवन से नाराज हो गया। उसने माफी मांगने से उत्तम मृत्यु को चुन लिया, उसने आत्महत्या कर अपने जीवन लीला समाप्त कर लिया। उपर्युक्त बेतिया पुलिस अंतर्गत घटना बैरिया थाना क्षेत्र के बगही रतनपुर पंचायत स्थित वार्ड 3 की बताई गई है। बैरिया थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए जीएमसीएच बेतिया भेज दिया गया है। उपर्युक्त मामला की छानबीन की जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार तुलसी चौधरी का पुत्र मूरत चौधरी और इंग्रासन चौधरी का पुत्र मनोज चौधरी के बीच किसी मामले को लेकर विवाद हुआ। विवाद के निपटारा के लिए पंचों ने पंचायती में मूरत चौधरी को कारी चौधरी के पक्ष से (माफी) क्षमा मांगने का निर्णय दिया। क्षमा मांगने की बात पर मूरत चौधरी ने यह प्रतिक्रिया दिया कि भले ही अपने जीवन को को समाप्त कर लेगा, परंतु झुक कर क्षमा (माफी) मांगना उस
से संभव नहीं है। फिर क्या, मूरत चौधरी ने आत्महत्या कर लिया। कुछ लोगों ने बताया कि उसने खेतों में डाले जाने वाले कीटनाशक को निगल लिया है। हालाकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। उसकी मौत फंदे लगाकर लटकने से हुई या  विषपान करने से, यह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा। एसडीपीओ सदर 2 रजनीशकांत प्रियदर्शी ने बताया कि घटना की सूचना मिली है। पुलिस शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप चुकी है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। उसके परिजनों के आवेदन के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बताया जाता है कि मूरत कुमार ने जब विषपान किया तो उसकी हालत बिगड़ने लगी। जिसके बाद परिजनों ने उसे स्थानीय पीएचसी में भर्ती कराया, जहां चिकित्सा के क्रम में उसकी मौत हो गई। मूरत का विवाह एक वर्ष पूर्व किया गया था। मृतक सात भाईयों में तुलसी चौधरी का चौथा पुत्र बताया गया है, घटना के बाद गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।  परिजन व्यथित व शोकाकुल है।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया